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Rashmi Singh

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भारत और न्यूजीलैंड के बीच 5 T20I मैचों की सीरीज बुधवार से शुरू हो चुकी है। सीरीज का पहला मुकाबला...

'अंडरग्राउंड' हुए ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामनेई का भविष्य क्या होगा? 1 min read

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामनेई पिछले सात महीनों में दूसरी बार 'अंडरग्राउंड' हो गए हैं. उन्हें अच्छी तरह...

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Bhojshala Case:मध्यप्रदेश के धार में भोजशाला को लेकर विवाद में हिंदू पक्ष की नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का गुरुवार...

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नई दिल्ली: 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान' के 11 साल पूरे होने पर PM मोदी ने एक खास पोस्ट किया है।...

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नोटिस को लेकर क्या कहा? इस मामले पर अपना पक्ष रखने के लिए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रेस क्रॉन्फ्रेंस बुलाई है। इसके अलावा अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है, "प्रशासन ये नहीं तय करेगा कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं है। भारत के राष्ट्रपति भी शंकराचार्य नहीं तय कर सकते, शंकराचार्य वही हैं, जिनको तीनों शंकराचार्य मानें और 2 पीठ के शंकराचार्य हमको लेकर पिछले माघ मेले में स्नान कर चुके हैं।" स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने पद की वैधता को लेकर स्पष्ट कहा कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार वही व्यक्ति शंकराचार्य होता है, जिसे अन्य पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। उन्होंने बताया कि शृंगेरी और द्वारका पीठ के शंकराचार्य उन्हें विधिवत स्वीकार करते हैं और पिछले माघ मेले में उनके साथ शाही स्नान भी कर चुके हैं, जबकि पुरी पीठ के शंकराचार्य ने भी उनके विरुद्ध कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है और सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में भी विरोध का कोई उल्लेख नहीं है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी, मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि शंकराचार्य कौन है, क्योंकि यह धर्म का आंतरिक विषय है, जिसका निर्णय केवल शंकराचार्य परंपरा के अनुसार ही हो सकता है। उन्होंने स्वयं को ज्योतिष्पीठ का निर्विवाद शंकराचार्य बताते हुए कहा कि जो लोग उनके पद पर सवाल उठा रहे हैं, वे दूषित भावना से प्रेरित हैं और यदि कोई अन्य व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य मानता है तो वह सामने आकर शास्त्रार्थ या खुली चर्चा करे। 1 min read

प्रयागराज: यूपी के प्रयागराज से बड़ी खबर है। मौनी अमावस्या पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने...

ब्रिटेन की एक अदालत ने एक मस्जिद के इमाम को एक नाबालिग जोड़े का विवाह कराने के आरोप में जेल की सज़ा सुनाई है. नवंबर 2023 में जब मस्जिद में यह विवाह हुआ, तब लड़की और लड़का दोनों की उम्र केवल 16 वर्ष थी. मस्जिद के इमाम अशरफ़ उस्मानी ने नॉर्थम्प्टन क्राउन कोर्ट को बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि निकाह की तारीख़ से नौ महीने पहले इंग्लैंड में शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ाकर 18 कर दी गई थी. 52 वर्षीय अशरफ़ उस्मानी ने इससे पहले अदालत की सुनवाई के दौरान नॉर्थम्प्टन सेंट्रल मस्जिद में बाल विवाह कराने से संबंधित दो आरोपों को स्वीकार किया था. अदालत के न्यायाधीश ने स्वीकार किया कि इस घटना में "हिंसा या ज़बरदस्ती" शामिल नहीं थी और युवक-युवती अपनी मर्ज़ी से अशरफ़ उस्मानी की मस्जिद में विवाह करने आए थे. इसी आधार पर मस्जिद के इमाम को 15 सप्ताह की जेल की सज़ा सुनाई गई, जिन्हें 12 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया. 52 वर्षीय मस्जिद के इमाम ने शादी के लिए 50 पाउंड का शुल्क लिया था. 1 min read

ब्रिटेन की एक अदालत ने एक मस्जिद के इमाम को एक नाबालिग जोड़े का विवाह कराने के आरोप में जेल...

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India vs New Zealand T20i Series: भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल मैचों की सीरीज 21 जनवरी...

नितिन नबीन को पीएम मोदी ने बताया अपना बॉस, जानिए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने क्या-क्या कहा 1 min read

नई दिल्ली: नितिन नबीन को भाजपा का 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। आज बीजेपी के मुख्यालय में उनके नाम...

शिंदे का होटल 'GAME' ऑन महायुति में मेयर पद को लेकर तेज हुई खींचतान के बीच डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने अपने सभी पार्षदों से मुलाकात की। एकनाथ शिंदे ने मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड में अपने पार्षदों से मुलाकात की। एकनाथ शिंदे ने साफ कर दिया है कि बीएमसी का मेयर महायुति का होगा। साथ ही बाड़ेबंदी पर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि नए लोग चुनकर आए हैं इसलिए उनके मार्गदर्शन के लिए उन्हें एक साथ रखा गया है और उनकी मुलाकात भी मार्गदर्शन के लिए ही थी। BJP नेतृत्व को क्या संदेश देने की कोशिश? बता दें कि यह शिंदे गुट की तरफ से बीजेपी नेतृत्व को यह संदेश देने की कोशिश है कि वे सिर्फ संख्या नहीं, सत्ता साझेदार हैं। 29 पार्षद सत्ता बनाने में निर्णायक नहीं हैं, लेकिन सत्ता के संतुलन में उनकी भूमिका शून्य भी नहीं है। जानकार मानते हैं कि शिंदे गुट को पहले से पता है कि ढाई-ढाई साल का मेयर फॉर्मूला या मुंबई स्टैंडिंग कमिटी चेयरमैन बीजेपी कभी स्वीकार नहीं करेगी। फिर भी ये प्रस्ताव रखे जा रहे हैं क्योंकि यह नेगोशिएशन का नहीं, नैरेटिव का खेल है। शिंदे गुट अपने कैडर और विधायकों को यह दिखाना चाहता है कि हमने कोशिश की, दबाव बनाया, लेकिन जनादेश बड़ा था। क्या है शिंदे गुट की असली चिंता? शिंदे गुट की असली चिंता मुंबई नहीं, ठाणे है। वह इलाका जिसे एकनाथ शिंदे की राजनीतिक राजधानी माना जाता है। संभावित डील का अंदरूनी फॉर्मूला यही माना जा रहा है- मुंबई में मेयर, सत्ता का चेहरा बीजेपी और ठाणे में मेयर व स्टैंडिंग कमिटी पूरी तरह शिवसेना (शिंदे)। मुंबई का मेयर कौन? बीजेपी- 89 पार्षद शिवसेना- 29 पार्षद NCP- 03 पार्षद कुल- 121 पार्षद मेयर के लिए चाहिए- 114 पार्षद क्या संकेत दे रही फडणवीस की चुप्पी? देवेंद्र फडणवीस की अब तक की भूमिका पर ध्यान दें - कोई सार्वजनिक बयान नहीं, कोई प्रतिक्रिया नहीं, कोई काउंटर नहीं। यह राजनीतिक चुप्पी दरअसल यह संकेत देती है कि फैसला पहले ही तय है, सिर्फ समय बाकी है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि फडणवीस किसी भी तरह की रिसॉर्ट या प्रेशर पॉलिटिक्स को वैधता नहीं देना चाहते। तीसरे कोण से खेल रही उद्धव की शिवसेना वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) की एंट्री सिर्फ खेल बिगाड़ने की कोशिश मात्र है। इस पूरे घटनाक्रम में शिवसेना (UBT) तीसरे कोण से खेल रही है। सूत्रों के मुताबिक, यूबीटी के 65 पार्षद सदन से अनुपस्थित रह सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो बीजेपी अपने 89 पार्षदों के दम पर अकेले मेयर चुन सकती है और शिंदे गुट की सौदेबाजी पूरी तरह निष्प्रभावी हो सकती है। मुंबई को कब तक मिल पाएगा मेयर? हालांकि बाहर से यह पूरा मामला शक्ति-संघर्ष लगता है, लेकिन अंदरखाने जानकार एकमत हैं कि कोई दरार नहीं है, कोई सत्ता संकट नहीं है, सिर्फ पोस्टिंग और पोजिशनिंग का खेल है। जानकारों के मुताबिक बीजेपी मुंबई में मेयर बनाएगी। शिंदे गुट ठाणे में संतुष्ट होगा। बीएमसी की यह राजनीति न तो रिसॉर्ट की है, न ही बगावत की। यह मैनेज्ड पॉलिटिक्स है जहां हर कदम, हर चुप्पी और हर देरी एक पहले से तय स्क्रिप्ट का हिस्सा है। अब बस औपचारिक ऐलान बाकी है - देवेंद्र फडणवीस की दावोस से वापसी के बाद। 1 min read

मुंबई महानगरपालिका में मेयर पद को लेकर जो कुछ दिख रहा है, वह जितना जटिल दिखाई देता है, उतना है...

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