इसराइल भारत के इन 5800 लोगों को क्यों बुला रहा है?
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भारत के उत्तर पूर्वी राज्य मिज़ोरम में रहने वाले बेनी मनाशे समुदाय के लोग अब इसराइल में बसने की तैयारी कर रहे हैं. ये ख़ुद को यहूदी समुदाय की खोई हुई जनजातियों में से एक का वंशज मानते हैं.
साल 2025 में इसराइल सरकार ने एक योजना को मंज़ूरी दी थी. इस योजना के तहत भारत के बेनी मनाशे समुदाय के सभी लोग आने वाले सालों में इसराइल जा सकते हैं. कुछ लोग पहले भी जा चुके हैं.
अभी भारत में इनकी तादाद क़रीब पांच हज़ार आठ सौ है. इनके इसराइल जाने का सिलसिला फ़रवरी 2026 से शुरू हो सकता है.
यह समुदाय मुख्य रूप से मिज़ोरम और पड़ोसी राज्य मणिपुर में रहता है.
पिछले दो दशकों में क़रीब चार हज़ार बेनी मनाशे लोग इसराइल जा चुके हैं. जाने की यह प्रक्रिया साल 2005 में एक प्रमुख रब्बी यानी यहूदी धर्म गुरु द्वारा इस समुदाय को यहूदी धर्म की एक खोई हुई जनजाति के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद शुरू हुई.
इस सिलसिले में मिज़ोरम में रहने वाले क़रीब छह सौ बेनी मनाशे समुदाय के लोगों ने भी इसराइल जाने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की है.
ये लोग इसराइल क्यों जाना चाहते हैं, उनसे ही यह जानने-समझने के लिए बीबीसी की टीम मिज़ोरम की राजधानी आइज़ॉल के कई इलाक़ों में गई.
