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चाबहार भारत के बजट से बाहर, क्या इस अहम पोर्ट से पीछे हटने की बन रही रणनीति?

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चाबहार में दो पोर्ट हैं- शाहिद कलंतरी और शाहिद बहिश्ती. यह होर्मुज जलसंधि से बाहर होने के कारण बड़े जहाजों के लिए सुरक्षित है और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से महज 170 किलोमीटर दूर स्थित है.

भारत ने इस साल अपने केंद्रीय बजट में ईरान में चाबहार बंदरगाह के लिए कोई रक़म जारी नहीं की है.

पिछले साल के बजट में भारत ने चाबहार बंदरगाह के लिए चार सौ करोड़ रुपए का प्रावधान किया था.

भारत ने साल 2017-18 से चाबहार बंदरगाह में निवेश शुरू किया था और ये पहली बार है जब भारत ने ईरान के साथ इस साझा परियोजना के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया है.

विश्लेषक मान रहे हैं कि भारत के चाबहार बंदरगाह से हाथ पीछे खींचने की बड़ी वजह अमेरिका की तरफ़ से बढ़ता दवाब और बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रम हैं.

पिछले दो साल में वैश्विक स्तर पर ईरान कमज़ोर हुआ है, विश्लेषक इसे भी भारत के चाबहार बंदरगाह में निवेश जारी नहीं रखने का बड़ा कारण मान रहे हैं.

ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध, क्षेत्रीय अस्थिरता और बदलती भू-राजनीति के कारण चाबहार की रफ्तार पहले भी धीमी रही है, लेकिन अब भारत के चाबहार के लिए फंड आवंटित ना करने से इसके ठप पड़ जाने की आशंका भी पैदा हो गई है.

चाबहार बंदरगाह भारत के लिए अहम क्यों?

चाबहार में दो पोर्ट हैं- शाहिद कलंतरी और शाहिद बहिश्ती.

यह होर्मुज जलसंधि से बाहर होने के कारण बड़े जहाजों के लिए सुरक्षित है और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से महज 170 किलोमीटर दूर स्थित है.

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