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फ़ैशन डिज़ाइनर कैसे बन सकते हैं और इस प्रोफेशन में कितनी कमाई हो सकती है?

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साल 2006. बिहार का छपरा ज़िला.

गौरव गोविंद भी लाखों दूसरे बच्चों की तरह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करना चाहते थे.

पहली पसंद थी क्रिकेट. लेकिन ज़िंदगी ने बल्ले की जगह हाथ में स्केच पेंसिल थमा दी..

रैम्प वॉक करते मॉडल, चमचमाती लाइट्स, ख़ूबसूरत डिज़ाइन पर गूंजती तालियां…फ़ैशन की दुनिया से गौरव की मुलाकात यहीं से होती है.

उसके बाद गौरव ने हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से पढ़ाई की, नामी डिज़ाइनर के साथ काम किया, स्टार्टअप बनाया और अब NIFT के वाराणसी कैंपस में पढ़ा रहे हैं. उनकी कहानी बताती है कि फैशन डिज़ाइनिंग करियर का एक मुकम्मल रास्ता है.

लेकिन इस रास्ते तक पहुंचना कैसे है और इस राह पर चलने वालों का भविष्य कैसा होता है, करियर कनेक्ट सिरीज़ की इस कड़ी में आज हम यही समझेंगे.

भारत में गौरव गोविंद जैसे हज़ारों लोग इन दिनों फ़ैशन जगत को अपना करियर बना रहे हैं.

यहां की टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री करीब 4.5 करोड़ लोगों को रोज़गार देती है. इसे कृषि के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी रोज़गार देने वाली इंडस्ट्री कहा जाता है. ख़ास बात ये है कि इसमें महिलाओं और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों की भी अच्छी-ख़ासी हिस्सेदारी है.

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