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सुनीता विलियम्स ने क्यों कहा, ‘मुझे गुजरात में अपने पैतृक गांव जाना ही होगा’

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“जब आप ऊपर से पृथ्वी को देखते हैं, तो बहस और लड़ाई करना बहुत ही अजीब लगता है.”

लगभग तीन दशकों के अपने करियर में भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता ‘सुनी’ विलियम्स के लिए अंतरिक्ष से दिखने वाला नजारा एक अद्भुत छाप छोड़ गया है.

एक ऐसी छाप जो मानवता, तकनीक और पृथ्वी के प्रति उनके दृष्टिकोण को लगातार आकार दे रही है.

सुनीता विलियम्स नासा में 27 साल काम करने के बाद दिसंबर में रिटायर हुईं. वह हाल ही में कोझिकोड में संपन्न हुए केरल साहित्य महोत्सव में भाग लेने के लिए भारत में थीं. करीब एक दशक के बाद वो भारत आई थीं.

दिल्ली और केरल की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने छात्रों, वैज्ञानिकों और फेस्टिवल में मौजूद रहे लोगों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में बिताए अपने जीवन और अपने करियर के अप्रत्याशित आखिरी चैप्टर के बारे में बताया.

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर तीन लंबी अवधि के मिशनों के दौरान विलियम्स ने ऑर्बिट में 600 से अधिक दिन बिताए. उन्होंने एक महिला के रूप में सबसे ज्यादा स्पेसवाक का रिकॉर्ड बनाया.

उन्होंने कहा, “मैंने नासा में नौकरी करने के बारे में कभी नहीं सोचा था. मैंने अंतरिक्ष में जाने की बिल्कुल भी कल्पना नहीं की थी.”

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