‘जमीन पर भी हो लागू…’, मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली बोले- संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान ने दिया सकारात्मक संदेश
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के एग्जीक्यूटिव मेंबर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने हिंदू-मुस्लिम एकता को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया दी है।
मौलाना खालिद रशीद ने रविवार को न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “जहां तक मोहन भागवत के बयान की बात है, मेरा मानना है कि उन्होंने जो कुछ भी कहा है, उसे हमारे देश में जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। तभी ऐसे बयान को सकारात्मक बयान कहा जा सकता है। हालांकि, भारतीय समुदाय के लिहाज से इस बयान ने एक सकारात्मक संदेश दिया है।”
निजी फायदे के लिए काम कर रहे नेता- मौलाना
मौलाना फिरंगी महली ने कहा, “यह सच्चाई यह है कि बड़ी संख्या में लोग, या ज्यादातर राजनेता, अपने निजी स्वार्थ के कारण राजनीति कर रहे हैं। हालांकि, राजनीति की बात करें तो अगर सत्ता में बैठे लोग लोगों की समस्याओं को हल कर पाते हैं, तो यह एक बड़ी समाज सेवा है… लेकिन ज्यादातर राजनेता आम जनता और देश के हित के बजाय अपने निजी फायदे के लिए काम कर रहे हैं।”
तो वह हिंदू नहीं है…
मोहन भागवत ने कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए तो वह हिंदू नहीं है। मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और इस पर खुशी जताई जानी चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (AHEAD) फोरम द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में कही।
विविधता को अपनाने का आह्वान
6,000 से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने का आह्वान किया। भागवत ने कहा, ”जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है : विविधता में एकता।” उनकी इस बात पर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।
भागवत ने कहा, ”भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।” उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा, ”भारत को कौन-सी नियति मिली है? भारत का उद्देश्य इस विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है। हम एक हैं और हमारी यही विविधता हमारी एकता को और अधिक खूबसूरत बनाती है।”
