तुलसी दास ने राम के आदर्शो से समाज को दी नई चेतना
1 min readदेवरिया। नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया के तत्वावधान में आयोजित तुलसी जयंती समारोह में वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य और उनके सामाजिक दृष्टिकोण को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया। मुख्य अतिथि जयपुर के राव शिवराज पाल सिंह ने कहा कि तुलसीदास ने समाज को ऐसा आदर्श दिया, जिससे अपसंस्कृति से मुकाबला करने की शक्ति मिली।
उन्होंने कहा कि हिंदी का भक्ति काल काफी उथल-पुथल वाला दौर था। तुलसी से पहले कबीरदास ने भी सामाजिक विसंगतियों के विरुद्ध आवाज उठाई, लेकिन तुलसीदास ने जनता के सामने राम के रूप में एक आदर्श प्रस्तुत किया। राम ने अत्याचार के समर्थन वाली सत्ता का परित्याग कर लोकमर्यादा का उदाहरण रखा। तुलसी ने भक्ति के माध्यम से पूरे देश में नई चेतना का संचार किया और लोगों को धार्मिक व जातीय पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर देश और संस्कृति के प्रति सजग किया। तुलसी हमेशा दीपस्तंभ की तरह समाज को प्रकाश देते रहेंगे।
मुख्य वक्ता तुलसी साहित्य मर्मज्ञ बलिया के डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने कहा कि तुलसी जयंती क्यों मनाई जाए, इसका उत्तर तुलसी के साहित्य और विचारों में ही मिलता है। उन्होंने वेद, निगम और आगम से चली आ रही कठिन ज्ञान परंपरा को लोकभाषा के माध्यम से सहज और सरल बनाया। तुलसी युगद्रष्टा कवि और संत थे, जिन्होंने पांच सौ वर्ष पहले ही भविष्य की अनेक परिस्थितियों को समझ लिया था। उनका मानना था कि जब गृहस्थ और किसान समृद्ध होंगे, तभी देश वास्तविक अर्थों में उन्नत होगा। आज जब संत और शासक समृद्ध होते जा रहे हैं और किसान गरीब, तब तुलसी के विचार और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि लंका में कोई तुलसी होता तो शायद वह जलने की स्थिति तक नहीं पहुंचती। इसलिए तुलसी सदैव प्रासंगिक रहेंगे।
विशिष्ट अतिथि अनंत आश्रम, बरहज के पीठाधीश्वर आन्जनेय दास जी महाराज ने कहा कि वेदों में ‘अथातो ब्रह्म जिज्ञासा’ की बात कही गई है, लेकिन उनके मत में ब्रह्म से पहले संत जिज्ञासा होनी चाहिए। भारत की भूमि पर तुलसी जैसे संत का जन्म हुआ, जो पांच सौ वर्षों से समाज को प्रकाश दे रहे हैं। तुलसीदास ने संत और गृहस्थ दोनों के लिए आदर्श प्रस्तुत किए, जिनका अनुसरण आज भी आवश्यक है।
समारोह का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती की पूजा और दीप प्रज्ज्वलन से किया। इसके बाद सभा के मंत्री एवं अध्यक्ष ने अतिथियों को प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र एवं उत्तरीय भेंटकर सम्मानित किया। सभा के मंत्री डॉ. अनिल त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए श्रोताओं से उनका परिचय कराया। दयाशंकर कुशवाहा ने सरस्वती वंदना और रंजीता श्रीवास्तव ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. अभय द्विवेदी ने किया। समारोह का संयोजन नेशनल पब्लिक स्कूल, देवरिया के प्रबंध निदेशक संजय शंकर मिश्र ने किया।
प्रतियोगिताओं के विजेता हुए सम्मानित
समारोह में तुलसी साहित्य प्रतियोगिता में सफल विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। निबंध प्रतियोगिता में वर्षा द्विवेदी और अश्विन सिंह ने प्रथम, पलक मिश्रा और आकांक्षा पाण्डेय ने द्वितीय तथा अंकित मौर्य और आंचल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। किरण यादव, अंजलि कुशवाहा, श्रेया सिंह, अनामिका, प्रगति यादव, अंकित प्रजापति और कशिश गौतम को सांत्वना प्रमाण पत्र दिया गया।
भाषण प्रतियोगिता में स्तुति मिश्रा प्रथम, श्रेया सिंह द्वितीय और अनन्या त्रिपाठी तृतीय रहीं। मांगलिक मिश्रा, आराध्या पाठक और अंशिका मणि त्रिपाठी को सांत्वना पुरस्कार मिला।
सुपठन प्रतियोगिता में हरिओम जायसवाल प्रथम, आर्या सिंह द्वितीय और आयुष मिश्र तृतीय रहे। प्रीति यादव, जान्ह्वी मिश्रा, विदिता मिश्रा, मान्या मिश्रा और रत्नवी श्री भारद्वाज को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
समारोह में सरोज कुमार पाण्डेय, इन्द्र कुमार दीक्षित, दिनेश कुमार त्रिपाठी, अधिवक्ता बृजेश पांडेय, नन्दलाल मणि, मधुसूदन मणि त्रिपाठी, ऋषिकेश मिश्र, संजय कुमार राव, हिमांशु सिंह, डॉ. शकुंतला दीक्षित, डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी, नित्यानंद तिवारी, रवीन्द्र नाथ तिवारी, रवि प्रकाश मिश्र, त्रिभुवन नाथ मिश्र, रमेश चन्द्र त्रिपाठी, भृगुदेव मिश्र, अक्षैवर तिवारी, सौदागर सिंह, अखिलेश जायसवाल, पुरुषोत्तम मरोदिया, अटल कुमार बरनवाल, बद्री प्रसाद वर्मा, कौशल कुमार मिश्र, अनिल कुमार मिश्र, क्षमा श्रीवास्तव, सच्चिदानन्द राणा, अखिलेश त्रिपाठी, श्वेतांक मणि, जगदीश उपाध्याय, विनय भारत सिंह, गोरखनाथ गुप्त, गोपाल जी त्रिपाठी, वरुण पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।
