CJP का आंदोलन खत्म, अब अयोध्या की ओर देख रहा विपक्ष; यूपी पर हो सकता है पूरा फोकस
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन थम गया है। इस बार 20 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ था और इसी दीन सीजेपी ने संसद मार्च किया। मार्च के दौरान पुलिस ने लाठियां भांजी तो विपक्ष का भी पूरा फोकस इसी ओर शिफ्ट हो गया। संसद में हंगामे हुए और कोई चर्चा नहीं हो पाई। कांग्रेस ने साफ तौर पर कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, पेपर लीक पर वह चर्चा करने को तैयार नहीं है। हालांकि शिक्षा मंत्री के बाद अब सरकार सोमवार को ही पेपर लीक के खिलाफ विधेयक पेश कर रही है। ऐसे में विपक्ष अब अपना फोकस अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विषय पर शिफ्ट कर सकता है। राहुल गांधी ने पहले ही कह दिया है कि केवल धर्मेंद्र प्रधान को ही नहीं बल्कि गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। ऐसे में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी अयोध्या मामले को फोकस में रखकर अब गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर ले सकते हैं।मॉनसून सत्र से पहले विपक्ष ने अयोध्या मामले को सबसे ऊपर रखा था। हालांकि सीजेपी का आंदोलन बड़ा हो गया तो विपक्ष इसी ओर खिसक गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा था कि जिस तरह से छात्रों पर लाठियां बरसाईं हैं उसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं और यह सदन में बड़ा मुद्दा होने वाला है। उन्होंने शनिवार को भी प्रेस ब्रीफिंग करके कहा कि प्रधानमंत्री को इस सारे घनटाक्रम के लिए माफी मांगनी चाहिए।
अयोध्या मुद्दे को उठाएगा विपक्ष
सोमवार को मोदी सरकार लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट और सजा को कड़ी करने वाला विधेयक लेकर आ रही है। पेपर लीक पर चर्चा के बाद विपक्ष का पूरा फोकस अयोध्या पर हो सकता है। 2027 में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वााले हैं। ऐसे में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ही उत्तर प्रदेश पर फोकस करना चाहती हैं। इस समय उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा मुद्दा राम मंदिर चढ़ावा चोरी का ही है। इसी में राजनीतिक दलों को लाभ भी नजर आ रहा है।
हिंदू वोटो का है खेल
विपक्ष का फोकस अब हिंदू वोट पर होने वाला है। अयोध्या राम मंदिर का मुद्दा उठाकर विपक्ष सरकार को हिंदू विरोधी बताना चाहती है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि युवाओं के आंदोलन के चलते सरकार सदन में भी दबाव में आ गई थी। वहीं कांग्रेस ने शर्त रख दी कि बिना धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सदन में कोई चर्चा नहीं होगी। विपक्ष की इस बात का काट निकालने के लिए भी रास्ता निकालना सरकार के लिए जरूरी हो गया था। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बीजेपी सदन में एक बार फिर कांग्रेस सरकार के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों की लिस्ट सदन में पेश कर सकती है।
