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NEET Success Story : भेड़ें चराईं, खेतों में काम, सोलर लैंप में पढ़ा, नीट क्रैक कर डॉक्टर बनेगा किसान का बेटा

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NEET UG Success Story: कर्नाटक के पुट्टाराज भीमनूर ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि जब इरादे मजबूत हो तो सफलता के आड़े आने वाली गरीबी और कठिन परिस्थितियां भी हार मान लेती हैं। भेड़ बकरियां चराने वाले पुट्टाराज ने शानदार रैंक के साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी क्रैक कर लाखों गरीब विद्यार्थियों के सामने शानदार मिसाल पेश की है। आमतौर पर छात्र वीकेंड पर मौज मस्ती और घूमना फिरना करते हैं लेकिन कोप्पल जिले के छोटे से गांव हनुमानहल्ली के रहने वाले पुट्टाराज भीमनूर छुट्टियों के दौरान भेड़ें चराते थे और खेतों में काम करते थे। फुर्सत के पलों में वे पिता के साथ बोरवेल व मोटर मरम्मत का काम भी करते थे। अब पुट्टाराज ने नीट यूजी 2026 में एसटी वर्ग में ऑल इंडिया रैंक 694 हासिल कर अपने डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी है। नीट परीक्षा 2026 में उनके 511 अंक है। उनकी ऑल इंडिया 76,000वीं रैंक है।

पिता दिव्यांग, 8वीं तक पढ़े और मां कभी स्कूल नहीं गईं

उनके पिता महाबलेश्वर, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और केवल 8वीं कक्षा तक पढ़े हैं, मोटर रिवाइंडर और बोरवेल रिपेयर टेक्नीशियन के तौर पर काम करते हैं। उनकी मां सुवर्णा को कभी स्कूल जाने का मौका नहीं मिला। फिर भी, वे इस बात पर अडिग रहे कि उनका बेटा वह शिक्षा हासिल करे जो उन्हें कभी नहीं मिली।

सोलर लैंप की रोशनी में की पढ़ाई

उनके माता-पिता ने कहा, “हमें दिन में केवल सात घंटे बिजली मिलती है, इसलिए पुट्टाराज अक्सर रात में सोलर लैंप का इस्तेमाल करके पढ़ाई करते थे। वह हर दिन सुबह 6 बजे पढ़ाई के लिए उठते थे। जब इस साल NEET दोबारा आयोजित किया गया, तो हमने उन्हें CET के ज़रिए दूसरे प्रोफेशनल कोर्स के बारे में सोचने का सुझाव दिया। लेकिन उन्हें भरोसा था कि वह कम से कम 505 अंक हासिल करेंगे।”

20 लोगों का परिवार, एक छोटा सा घर

पुट्टाराज आर्थिक रूप से बेहद सामान्य परिवार से आते हैं। उनके दादा-दादी सहित 20 सदस्य सिर्फ 60×25 फीट के एक घर में रहते हैं। उनके दादा-दादी, हनुमप्पा और उदाचम्मा को याद है कि पुट्टाराज छह साल की उम्र से ही डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। उन्होंने कहा, “भेड़ बकरियों को नहलाते या घर के काम करते समय वह डॉक्टर की तरह हमारा चेकअप करने का नाटक करते थे, जिससे सभी हंसने लगते थे। आज हमें गर्व है कि आखिरकार हमारे परिवार में एक डॉक्टर होगा।”

भाई ने परिवार का पेट पालने के लिए छोड़ी थी पढ़ाई

पुट्टाराज तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके बड़े भाई चिरंजीवी ने परिवार की मदद करने और पिता का हाथ बंटाने के लिए स्कूल छोड़ दिया था, जबकि उनकी छोटी बहन पूर्णिमा गंगवती के कित्तूर रानी चेन्नम्मा सरकारी गर्ल्स स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ रही हैं।

स्कूल प्रिंसिपल ने पुट्टाराज की प्रतिभा को बताया असाधारण

गंगवती के श्री विद्यानिकेतन पीयू कॉलेज के प्रिंसिपल और डायरेक्टर जगन्नाथ राव ने कहा, “पुट्टाराज एक बेहद प्रतिभाशाली विद्यार्थी है। उसका टैलेंट असाधारण हैं। उनके एकेडमिक परफॉर्मेंस को देखते हुए हमने उनकी कॉलेज की फीस माफ कर दी थी। वह नियमित रूप से क्लास में आता था और रोजाना 8-10 घंटे पढ़ाई करता था।”

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