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राम मंदिर में ‘खास’ लोगों की वापसी, कृष्ण मोहन के एक-एक फैसले पलट रहे नए महासचिव गोविंददेव

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अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव बनाए गए गोविंददेव ने अंतरिम महासचिव रहे कृष्ण मोहन के एक-एक फैसले को पलटना शुरू कर दिया है। दान चोरी के बाद हटाए गए कर्मचारियों की वापसी शुरू कर दी है। इनमें विनोद राव और अनिल मिश्रा के खास कर्मचारी भी शामिल हैं। इन्हें एक-एक कर दोबारा पुराने स्थानों पर तैनाती मिल रही है। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब दो दिन पहले ही चंपत राय और अनिल मिश्रा राम मंदिर के तीर्थ सेवा केंद्र पहुंचे थे। चंपत राय ने कर्मचारियों से यहां तक कहा था कि कोई परेशानी हो तो हमें बताएं। गोविंद देव ने भी महासचिव का पद संभालने के बाद सबसे पहले चंपत राय से ही मुलाकात की थी और व्यवस्थाओं को समझा था। ऐसे में माना जा रहा है कि एक बार फिर पुरानी टीम के हाथों में ही पूरी व्यवस्था आ गई है।

आते ही व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटे थे कृष्ण मोहन

राम मंदिर में दान चोरी के बाद महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दिया तो कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया था। उन्होंने आते ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना शुरू कर दिया। जिन कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं, उनके पर कतरने शुरू कर दिए। कई कर्मचारियों को नोटिस देना शुरू किया और कई के पटल बदलने की कार्यवाही की। इन कई कर्मचारी विनोद राव और अनिल मिश्रा के खास भी शामिल थे। उस समय सबसे ज्यादा निशाने पर रहे विनोद राव और अनिल मिश्रा इन कर्मचारियों को नोटिस या हटाने का कोई विरोध नहीं किया।

कर्मचारियों के पटल बदले, नोटिस जारी की

कृष्ण मोहन ने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों के पटल बदले और नोटिसें दीं। हालांकि नोटिसों पर अमल अभी तक नहीं किया गया था। दो सितंबर की ट्रस्ट की बैठक में नए सीईओ के नाम पर मुहर लगने के साथ ही महासचिव की जिम्मेदारी गोविंददेव के हाथों में आ गई। उन्होंने आते ही कृष्ण मोहन के फैसलों को पलटना शुरू कर दिया। इसी कड़ी में गोपाल राव के सबसे करीबी सोमेश अलंदी को तीर्थ क्षेत्र पुरम से वापस राम मंदिर में तैनात करने का आदेश पारित कर दिया गया है। बताया गया कि अभी सोमेश अलंदी ने अपनी ज्वाइनिंग राम मंदिर में नहीं दी है बल्कि तीर्थ क्षेत्र पुरम में ही हैं। इस बीच बहाली का आदेश उन्हें प्राप्त हो गया है।

नोटिसों को वापस लेने और निष्प्रभावी करने का आदेश

उधर, कृष्णमोहन के कार्यकाल में राम मंदिर में कार्यरत दर्जनों कर्मचारियों को जारी किए गये कारण बताओ नोटिस को भी वापस लेने या नोटिसों को निष्प्रभावी करने का भी आदेश हो गया है। इसके अलावा राम मंदिर में पटल परिवर्तन के जरिए दायित्व परिवर्तन के आदेश को भी दोबारा पलटकर पूर्व आदेश को भी प्रभावी रखने का निर्देश दिया गया है। इनमें पूर्व ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र के खास बताए जाने वाले केडी तिवारी को पुराने दायित्व को सौंपना खास चर्चा का विषय बन गया है। इसके पहले राम मंदिर में अलग-अलग एजेंसियों के लंबित सभी भुगतान का भी आदेश दे दिया गया था।

संदीप, केडी तिवारी और बजरंग पाठक को भी पुराने दायित्व

दो दिन पहले शहीद कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे संदीप गुप्ता के साथ ही केडी तिवारी और बजरंग पाठक को भी पुराने दायित्वों के साथ बहाल कर दिया गया था। तीर्थ यात्री सेवा केंद्र में लॉकर व्यवस्था में लगाए गए कर्मचारी संदीप गुप्ता को विदेशी महिला की शिकायत के बाद व्यवस्था से हटा दिया गया था। विदेशी महिला ने लॉकर में सामान रखने को लेकर हुई कहासुनी के बाद ट्रस्ट को शिकायती पत्र दिया था। अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने शिकायत के आधार पर संदीप को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर उन्हें काम से पूरी तरह हटा दिया गया था। बताया जा रहा है कि शहीद कारसेवक के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए संदीप गुप्ता को राम मंदिर में काम दिया गया था।

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