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डिग्री का खेल या दस्तावेज़ों का जाल? नगवा खास प्रकरण ने हिलाई बुनियाद

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देवरिया। रुद्रपुर ब्लॉक के नगवा खास प्राथमिक विद्यालय से उठा एक विवाद अब पूरे शिक्षा तंत्र की साख पर प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा है। आरोप है कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाई। शिकायतकर्ता सुजीत कुमार राव ने शपथपत्र के साथ दावा किया है कि संबंधित शिक्षक के हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और बीए के दस्तावेजों में ऐसी विसंगतियां हैं, जिन्हें महज टंकण त्रुटि कहकर टाला नहीं जा सकता।
मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड अभिलेखों में अंकपत्र का वर्ष, विश्वविद्यालय का नाम और मान्यता संबंधी तथ्य आपस में मेल नहीं खाते। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस विश्वविद्यालय से डिग्री दर्शाई गई, वह उस अवधि में मान्यता प्राप्त था या नहीं। यदि आरोप सही निकले तो यह सिर्फ एक नियुक्ति का मामला नहीं, बल्कि सत्यापन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार होगा।
शिकायतकर्ता का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग से बार-बार सत्यापन की मांग के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि प्रमाणपत्रों की पड़ताल भी कागजी खानापूर्ति बन जाए, तो बच्चों का भविष्य किस भरोसे छोड़ा जाए?
बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने जांच का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि जांच सच्चाई तक पहुंचेगी या फिर फाइलों की धूल में सच दफन हो जाएगा। क्योंकि सवाल सिर्फ एक डिग्री का नहीं, पूरी व्यवस्था की डिग्निटी का है।

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