‘मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना ही लिखा है…’, गुजरात में ऐसा क्यों बोले गृह मंत्री अमित शाह?
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि मुझे हमेशा से गृह मंत्रालय ही मिलता है। मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना ही लिखा है। साथ ही, गृह मंत्री ने कोरोना काल का जिक्र कर कहा कि उस समय देश ने जिस धैर्य का परिचय दिया वो काबिले तारीफ है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यक्रम में कहा, “मैं एक अनुभव बताना चाहता हूं कि मैं जब भी राज्य या केंद्र में मंत्री बना हूं, मुझे गृह मंत्रालय ही मिला है। तो मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना ही लिखा है। आतंकियों से भी निपटना है। एक कर्फ्यू को लागू करना होता है तो अहमदाबाद जैसे शहर में कम से कम 300 पुलिस की गाड़ी पर माइक लगाकर घोषणा करानी पड़ती है कि कल सुबह आठ बजे से कर्फ्यू लागू किया गया है कोई घर से बाहर ना निकले।”
अमित शाह ने कोरोना काल को याद किया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोरोना काल को भी याद किया। उन्होंने कहा, “कोरोना जब हमारे यहां पर दो मौतें हुईं और पुणे की लैब से सत्यापित किया कि कोरोना है और यह तेजी से फैलेगा। इसकी मेरे ऑफिस में प्रेजेंटेशन भी हुई। तब मैं पीएम मोदी के पास में चिंता लेकर गया था। पीएम ने मुझसे कहा कि चिंता करके क्या होगा, इसके रास्ते सोचने होंगे। उन्होंने कहा कि जनता कर्फ्यू लगाते हैं, जनता को साथ में लेना पड़ेगा। मैंने पूछा कि जनता कर्फ्यू क्या होता है, हम किसी को कानून से नोटिफिकेशन से घोषणाओं से बाधित नहीं करेंगे। हम आग्रह करें कि हमें अभ्यास करना पड़ेगा, कल सुबह आठ बजे से कल सुबह आठ बजे तक कोई घर के बाहर ना निकले।”
अमित शाह ने आगे कहा, “मैंने कहा कि साहब आप ऐसा प्रयोग करने जा रहे हैं जो विफल होगा। इतनी सारी घोषणाओं के बाद भी लोग निकलते हैं। दूसरे दिन सुबह आठ बजे से दूसरे दिन आठ बजे तक देश में पूरा रोड सुनसान था, कोई भी नहीं निकला और तब उन्होंने उनकी टीम को भरोसे से कहा था कि हम जीत जाएंगे। अगर जनता लड़ने को तैयार है तो हमें कोई नहीं रोक सकता है। फिर जब कोरोना खत्म हो गया तो हम लोग विश्लेषण करने के लिए बैठे कि हमने क्या खोया क्या पाया।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोविड वैक्सीन का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा, “कई सारी वैक्सीन ऐसी थी कि जो पश्चिम के देशों में आने के बाद 23 साल, 36 साल और 42 साल के बाद भारत में आई थी जब उनको कोई जरूरत नहीं थी। कोरोना में भारत सबसे पहले वैक्सीन बनाने वाले तीन देशों में शामिल था। हमने ना केवल भारत में दिया बल्कि दुनिया के 70 देशों में वैक्सीन भेजकर उनको बचाने का काम किया।”
