नेपाल पर दूसरी बाढ़ का भी मंडरा रहा खतरा, इस तबाही की वजह हो सकता है हिमस्खलन; जांच में जुटे साइंटिस्ट
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तिब्बत से नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई है। इस जल प्रलय में (खबर लिखे जाने तक) 100 के करीब लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल में तबाही के मंजर को देखते हुए यूपी और बिहार के कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अगले 10-12 घंटे इन जिलों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। इस बीच साइंटिस्ट नेपाल में मची इस तबाही की वजह का पता लगाने में लगे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के साइंटिस्ट नेपाल और चीन के पार्टनर इंस्टीट्यूशन के साथ मिलकर यह जांच कर रहे हैं कि क्या ऊंचाई वाले इलाके से बर्फ के चट्टान के टूटने (हिमस्खलन) से यह तबाही हुई है?
हिमस्खलन हो सकता है वजह
ICIMOD नेपाल की एक इंटर-गवर्नमेंटल संस्था है जो हिंदू कुश हिमालय (HKH) इलाके की सुरक्षा के लिए दुनिया भर में होने वाले प्रयासों को लीड करती है। इस संस्था को लगता है कि नेपाल में आई बाढ़ की वजह हिमस्खलन हो सकता है। हालांकि अभी इसकी वजह को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
साइंटिस्ट अपने विश्लेषण में जुटे
इस प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को देखते हुए ICIMOD के विशेषज्ञों ने उपलब्ध वीडियो फुटेज और प्रभावित क्षेत्रों से मिली शुरुआती जानकारी के आधार पर अपना विश्लेषण शुरू किया है। ICIMOD के मुताबिक, शुरुआती आकलन में संभावना जताई गई है कि भोटे कोशी नदी की सहायक नदी लेंडे खोला में बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टानों का मलबा गिरा होगा। इससे अचानक पानी का बहाव बढ़ा और पानी के साथ मिट्टी तथा बड़े पत्थर नीचे की ओर बहने लगे होंगे।
भूकंप के झटकों का भी हुआ जिक्र
बाढ़ की वजहों में भूकंप का जिक्र किया जा रहा है। नेपाल के विदेश मंत्री ने यह दावा किया था कि इस बाढ़ से पहले भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। हालांकि, शुरुआती विश्लेषण में भूकंपीय गतिविधि और बाढ़ के बीच तत्काल कोई सीधा संबंध नहीं मिला है। ICIMOD ने कहा है कि इस पहलू की भी जांच जारी है।
जिस इलाके में बाढ़ आई है वहां पहले भी हुई है तबाही
ICIMOD में क्लाइमेट और एनवायर्नमेंटल रिस्क के प्रमुख कियांगगोंग झांग ने कहा कि पिछले साल की बाढ़ में तबाह हुआ रसुवा का वही इलाका एक बार फिर खतरे की चपेट में आया है। उन्होंने कहा कि लेंडे खोला में बर्फ का हिमस्खलन बाढ़ की संभावित वजह हो सकता है, लेकिन फिलहाल इसे निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।
तेजी से बढ़ा जलस्तर
ICIMOD ने बाढ़ की असाधारण गति पर भी चिंता जताई है। संस्था के अनुसार, महज 30 मिनट के भीतर त्रिशूली नदी के गलछी क्षेत्र में जलस्तर करीब 9 मीटर और मालेखु में करीब 7 मीटर बढ़ गया। दोनों स्थान धाडिंग जिले में हैं और काठमांडू से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।
दूसरी बाढ़ की भी चेतावनी जारी
वैज्ञानिक यह भी जांच रहे हैं कि कहीं मलबे ने नदी के किसी संकरे हिस्से को कुछ समय के लिए अवरुद्ध तो नहीं कर दिया था जिस वजह से बाढ़ की स्थिति बन गई। यदि इसके पीछे जमा पानी अचानक बाहर निकलता है, तो इससे दोबारा तेज बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है। इसी संभावित खतरे को देखते हुए नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में बनी रुकावट पर भी नजर रखी जा रही है। नेपाल के लिए चिंता वाली बात यह भी है कि अधिकारियों ने दूसरी बाढ़ की आशंका को लेकर चेतावनी दी है और जिलोंग पोर्ट को खाली कराने के आदेश दिए गए हैं।
