नेपाल में तबाही मचाने वाली नदी भोटेकोशी का बिहार से क्या है संबंध, कहाँ से निकलती है और कहाँ पहुँचती है
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भोटेकोशी नदी में बुधवार को आई अचनाक बाढ़ के कारण नेपाल में 150 भारतीय पर्यटकों समेत लगभग 400 लोग लापता हो गए। तिब्बत से आने वाली इस नदी ने तिब्बत में भी तबाही मचाई है। साथ ही बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है।
कहाँ से निकलती है
भयानक तबाही मचाने वाली इस सीमापारीय नदी का उद्गम तिब्बत के शिशापांगमा पर्वत पर स्थित झांगझांगबो ग्लेशियर से होता है। तिब्बत में इसे पोइकु’ या ‘बोक्शू कहा जाता है। यहां से यह मनमोहक घाटियों और दर्रों से बहती हुई नेपाल में रसुवा और सिंधुपालचौक जिलों में प्रवेश करती है।
नेपाल में इसे भोटेकेशी कहा जाता है, जिसका नेपाली भाषा में अर्थ होता है- तिब्बती नदी। भोटे का अर्थ होता है ‘तिब्बत’,कोशी का अर्थ होता है ‘नदी’। आज भी नेपाल में कुछ लोग तिब्बत को भोटे कहते हैं।
नेपाल में ही सिंधुपालचौक में बार्हबिसे से इसे सुनकोसी कहा जाने लगता है। इसके बाद सुनकोशी, अरुण और तमोर जैसी प्रमुख नदियां मिलकर ‘सप्तकोशी’ नदी बनाती हैं। इसके बाद यह नेपाल के हनुमाननगर/कोसी बैराज क्षेत्र से बिहार में प्रवेश करती है। बिहार में इसे आम तौर पर कोसी नदी कहा जाता है। कभी ‘बिहार का शोक’ कही जाने वाली कोसी नदी आगे कटिहार में गंगा नदी में मिल जाती है।

इसकी भौगोलिक विशेषताएं
यह नेपाल की सबसे तेज गति से बहने वाली नदी मानी जाती है। खड़े और तीव्र ढाल वाले क्षेत्र से गुजरने के कारण यह तेज रफ्तार से बहती है, जिसके कारण इस नदी पर भोटेकोशी हाइड्रोपावर परियोजना समेत कई जलविद्युत परियोजनाएं स्थित हैं। इसलिए यह नदी नेपाल में बिजली आपूर्ति के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, भोटेकोशी नदी नेपाल के पर्यटन और राजस्व के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसकी घाटी व्हाइट-वॉटर राफ्टिंग और कायाकिंग के लिए दुनिया के प्रमुख स्थलों में गिनी जाती है। यहां बंजी जंपिंग भी काफी लोकप्रिय है। इन साहसिक गतिविधियों का अनुभव लेने के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
व्यापारिक दृष्टि से भी यह नदी घाटी नेपाल के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि काठमांडू को चीन (तिब्बत) की सीमा से जोड़ने वाला प्रमुख जमीनी मार्ग अरनिको हाईवे इसी नदी घाटी से होकर गुजरता है।
