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बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष ने बनाया ‘100 सीट वाला प्लान’, मुस्लिम जातियों पर खास फोकस

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भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी का खास फोकस प्रदेश की करीब 100 विधानसभा सीटों पर होगा, जहां मुस्लिम और हिंदू राजपूत, गुर्जर, जाट और त्यागी मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से आने वाले और प्रदेश बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष बासित अली ने कहा कि वह मुस्लिम समुदाय और बीजेपी के बीच मानी जाने वाली दूरी को कम करने पर काम करेंगे। इसके लिए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से मुस्लिम समुदाय को मिले लाभ की ‘हकीकत’ लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

अलग-अलग राज्यों के लिए अलग रणनीति

पीटीआई से बातचीत में बासित अली ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक मुद्दे और सामाजिक समीकरण अलग होते हैं। इसलिए वह विभिन्न राज्यों के बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे और चुनावी रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि शुरुआती तौर पर उन राज्यों पर पूरा ध्यान रहेगा, जहां निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

पश्चिमी यूपी की 100 सीटों पर खास नजर

उत्तर प्रदेश की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर बासित अली ने कहा कि पार्टी मुस्लिम और हिंदू राजपूत, गुर्जर, जाट तथा त्यागी मतदाताओं के प्रभाव वाली करीब 100 सीटों पर विशेष ध्यान देगी। उनके मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन समुदायों की मौजूदगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती है।

मुस्लिम राजपूतों को साधने की कोशिश

बासित अली ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजपूतों की अच्छी-खासी आबादी है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमाओं से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, जिन इलाकों में हिंदू राजपूतों की मजबूत मौजूदगी है, वहां मुस्लिम राजपूत आबादी भी कई जगह महत्वपूर्ण संख्या में है।

गुर्जर, जाट और त्यागी वोटरों पर भी नजर

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि मुस्लिम गुर्जर, मुस्लिम जाट और मुस्लिम त्यागी समुदाय मुख्य रूप से कृषि से जुड़े हैं और उनका अपनी जमीन से मजबूत रिश्ता है। उन्होंने दावा किया कि इन समुदायों के दूसरे सामाजिक समूहों के साथ समन्वय की संभावना अधिक है। उनके मुताबिक, दोनों धर्मों के इन समुदायों का सामाजिक संयोजन करीब 100 विधानसभा सीटों के चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है।

‘बीजेपी मुस्लिम विरोधी’ धारणा तोड़ने की तैयारी

बासित अली ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के बीच बीजेपी को लेकर ‘भ्रम’ फैलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश की आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत है, जबकि बीजेपी सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों में उनकी हिस्सेदारी 30 से 40 प्रतिशत तक है।

उन्होंने कहा कि पार्टी गरीब मुस्लिमों तक सरकार की योजनाओं से मिले लाभ की जानकारी पहुंचाएगी और बीजेपी के मुस्लिम विरोधी होने की धारणा को तोड़ने का प्रयास करेगी। उनका दावा था कि बीजेपी मुस्लिमों की वास्तविक हितैषी है, जबकि विपक्षी दलों ने लंबे समय तक उन्हें केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया।

गरीब मुस्लिमों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दावा

अली ने कहा कि जो गरीब मुस्लिम पहले सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते थे, उन्हें बीजेपी सरकारों के कार्यकाल में विशेष रूप से फायदा मिला है। उन्होंने मुस्लिम बहुल सीटों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुंदरकी और रामपुर जैसे क्षेत्रों में पार्टी ने लोगों के बीच मुफ्त खाद्यान्न और उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन जैसे लाभों को प्रमुखता से बताया।

कुंदरकी, संभल और रामपुर का दिया उदाहरण

बासित अली ने दावा किया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम बहुल इलाकों में बीजेपी के अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आए। उन्होंने कुंदरकी, संभल और रामपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं के एक महत्वपूर्ण हिस्से ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया।

‘स्नेह मिलन’ जैसे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की तैयारी

बासित अली इससे पहले उत्तर प्रदेश बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष रहते हुए मुस्लिम समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं। इनमें ‘स्नेह मिलन’ और ‘ना दूरी है, ना खाई है, मोदी हमारा भाई है’ जैसे अभियान शामिल रहे हैं। अब राष्ट्रीय स्तर पर वह चुनाव वाले राज्यों के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में बैठकें करने की तैयारी में हैं।

बुलडोजर कार्रवाई पर बीजेपी का बचाव

बीजेपी शासित राज्यों में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर मुस्लिम समुदाय में बढ़ती नाराजगी के सवाल पर अली ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल कानूनी कार्रवाई को हिंदू-मुस्लिम मुद्दे के रूप में पेश करते हैं।

मदरसों पर कार्रवाई के आरोप को किया खारिज

मदरसों को निशाना बनाए जाने के विपक्ष के आरोपों को भी बासित अली ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि किसी मदरसे को निशाना नहीं बनाया जा रहा है और कार्रवाई केवल कानून के मुताबिक अतिक्रमण के खिलाफ की जा रही है। उनका कहना था कि जो मदरसे कानूनी रूप से संचालित हो रहे हैं, वे पहले की तरह चलते रहेंगे और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।

यूपी के साथ उत्तराखंड और पंजाब पर भी नजर

बीजेपी ने हाल ही में बासित अली और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तारिक मंसूर को राष्ट्रीय टीम में अपने दो प्रमुख मुस्लिम चेहरों के तौर पर शामिल किया है। दोनों नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आते हैं। पार्टी के इस कदम को उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड और पंजाब समेत आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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