न FB, न इंस्टाग्राम की रील्स… जानिए NEET टॉपर की कामयाबी का राज, ऐसे पाए 720 में 700 नंबर
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NEET यूजी 2026 में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल करने वाली हैदराबाद की वैष्णवी दास आज लाखों छात्रों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं. उन्होंने 720 में से 700 नंबर हासिल किए हैं. उन्होंने अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए बताया कि जीवन में कुछ भी हासिल करने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं है. इतनी ही नहीं नीट में सफल होने के लिए उन्होंने 11वीं में ही सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी. इसके बाद उन्होंने लगातार मॉक टेस्ट दिए. उनकी इसी प्लानिंग ने उन्हें टॉप 20 में शामिल करने में सफल किया.
NEET यूजी 2026 का रिजल्ट जब से जारी हुआ है, तब से सक्सेस स्टोरी सामने आ रही है. इस बीच हैदराबाद की वैष्णवी दास ने अपनी सफलता के बारे में बताया गया है. 720 में से 700 नंबर लाने वाली वैष्णवी ने कक्ष 11वीं में ही सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी. उनका कहना है कि सोशल मीडिया पढ़ाई से ध्यान भटकाने का जरिया बन रहा था. उन्होंने आगे बताया कि लंबे समय तक पढ़ाई करना सफलता की गारंटी तय नहीं करता है बल्कि रोज के छोटे-छोटे लक्ष्य आपको आगे बढ़ाने में मदद करते हैं.
11वीं में छोड़ दिया सोशल मीडिया
वैष्णवी दास ने आगे बताया कि पढ़ाई में किसी तरह का कोई डिस्ट्रेक्शन न हो इसके लिए उन्होंने 11वीं में ही सोशल मीडिया से खुद को दूर कर लिया था. उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि हर छात्र को यह पहचानना चाहिए कि कौन-कौन सी चीजें उनकी पढ़ाई को खराब कर रही है.
रथ यात्रा के दौरान रिजल्ट
उन्होंने आगे बताया कि जब रिजल्ट आया तो वह अपने घर पर नहीं थीं. वह अपने माता-पिता के साथ रथ यात्रा के मौके पर मंगि दर्शन करने गई थीं. हम कार में थे. मंदिर पार करते ही रिजल्ट का ऐलान हुआ. मैंने तुरंत अपना रिजल्ट चेक किया. रिजल्ट देखकर मैंने जोर से चिल्लाया और माता-पिता को इसके बारे में बताया. आगे बताते हुए उन्होंने कहा कि कार को सड़क के किनारे रोक दी और मैं खूब रोई.
8वीं क्लास में देखा था डॉक्टर बनने का सपना
वैष्णवी ने बताया कि उन्होंने 8वीं कक्षा में ही सोच लिया था कि वह डॉक्टर बनेंगी. इसके बाद उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी गंभीरता से शुरू की. उन्होंने चैतन्य के MPL प्रोग्राम में दाखिला लिया और 12वीं तक वहीं से नियमित तैयारी करती रहीं.
मॉक टेस्ट सबसे बड़ी ताकत
अपनी तैयारी को लेकर बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी तैयारी में सबसे बड़ी भूमिका मॉक टेस्ट की रही है. शुरुआत में सीमित टेस्ट होते थे लेकिन दिसंबर से रोजाना एक फुल सिलेबस मॉक टेस्ट देना शुरू किया गया. एग्जाम पास आने पर उन्होंने रोजाना दो-दो फुल सिलेबस मॉक टेस्ट देना शुरू किया.
