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राम मंदिर से 800 ग्राम सोने वाली मानस भी गायब, पूर्व गृह सचिव का आरोप; केजरीवाल बोले- महापाप

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अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। इस मामले की जांच पुलिस और एसआईटी कर रही है। आठ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इस बीच मध्य प्रदेश कैडर के 1970 बैच के आईएएस अधिकारी भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव रहे एस.लक्ष्मीनारायण के बयान से सनसनी फैल गई है। एस.लक्ष्मीनारायण का कहना है कि उन्होंने परिवार की राय से करीब सवा कुंतल की श्रीरामचरित मानस भेंट की थी जिसमें करीब आठ सौ ग्राम सोना था। बाद में पता चला कि वह गायब हो गई। पूर्व गृह सचिव का कहना है कि उन्होंने कई बार चंपत राय से शिकायत की, पत्र भी लिखे लेकिन उनसे ठीक ढंग से बात भी नहीं की गई। पूर्व गृह सचिव के इस बयान के साथ ही दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल भी इस मामले में कूद गए। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि ‘चंदा चोरों ने महापाप किया है।’

क्या कहा है पूर्व गृह सचिव ने

मीडिया से बातचीत में पूर्व गृह सचिव एस.लक्ष्मीनारायण ने कहा कि मेरे घर में करीब 15 सौ साल से ऊपर की रामायण अभी भी मौजूद है जिसकी मेरे पूर्वज पूजा करते रहे। इसके अलावा मेरी ससुराल में भी जो सबसे पहले आडवाणी जी और विश्व हिंदू परिषद ने राममंदिर के लिए Bricks इकट्ठा करनी शुरू कीं, तो फर्स्ट Briks त्रिवेंदरम में मेरे ससुराल में लोड हुई जिन्हें पहले कन्याकुमारी ले जाया गया और वहां से शुरू हुआ। मेरी पत्नी भी चाहती थीं और मेरी मां भी जिंदगी भर राम, राम लिखती थीं। हमने सोचा कि जब इतना बड़ा राम मंदिर बन रहा है तो फिर क्यों नहीं राम चरित मानस बनाकर दें, उसकी भी पूजा होती रहेगी, लोग भी दर्शन करेंगे, भगवान का आशीर्वाद ले सकेंगे। तो मैंने 8 अप्रैल 2024…वो पहली राम नवमी थी, जब रामलला की स्थापना हो चुकी थी। मुझे पुलिस ने बताया था कि रामनवमी के दिन आएंगे तो लाखों की भीड़ होगी, आप रख नहीं पाएंगे इसलिए रामनवमी जब शुरू हो रही है तो…पंडितों ने भी कहा कि बहुत शुभ दिन है…पहले दिन रख आइए। मुझे रखवाने में वहां की स्थानीय पुलिस ने बहुत मदद की क्योंकि सवा कुंतल की रामचरित मानस को ऊपर चढ़कर रखवाना पड़ा। लेकिन तीन-चार महीने बाद मुझे एक दिन बताया गया कि रामचरित मानस नहीं दिख रही है। मंदिर में दर्शन करने गए मेरे रिश्तेदारों ने इस बारे में बताया।

पूर्व गृह सचिव एस.लक्ष्मीनारायण का कहना है कि मैं अयोध्या गया तो नौ घंटे के इंतजार के बाद चंपत राय जी से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे पास तो कई लोगों के इस तरह के आभूषण और इस तरह की चीजें आ रही हैं तो मैं क्या इन्हीं सब चीजों का डिस्प्ले ही करता रहूंगा। मुझे यह बहुत अच्छा नहीं लगा। मैंने उनसे हाथ जोड़कर बोला कि यह मेरी पूरी जिंदगी की पूंजी है। मेरी मां की पूरी ज्वेलरी भी मेल्ट करवाकर मैंने इसमें गोल्ड पेंटिंग कराई है। इसमें एक किलो नहीं तो कम से कम आठ सौ ग्राम गोल्ड तो चढ़ी हुई है। यह बहुत मेहनत से बनी है। जिन लोगों ने संसद के लिए सेगोल बनवाया था, उन्हीं लोगों ने इसको बनवाया है तो कृपा करके इसे रखवा दीजिए। आपने तो मुझे आश्वस्त किया था कि ये रामलला के साथ रखवाएंगे। फिर आपने मुझसे कहा कि वहां नहीं रखवा सकते, बाहर रखवा देंगे। अब आप बता रहे हैं कि नहीं रख सकते।

पूर्व आईएएस एस.लक्ष्मीनारायण ने कहा कि मैंने उनसे हाथ जोड़कर फिर कहा कि मैंने आपको कई पत्र भी लिखे हैं, आप जवाब नहीं देते। तब उन्होंने कहा कि मैं जो चाहूंगा वही होगा, आप जाइए। पूर्व गृह सचिव ने कहा कि इसके बाद बहुत दुखी होकर मैंने अपने शुभचिंतक और राममंदिर निर्माण का काम देख रहे नृपेंद्र मिश्र को बताया। बकौल एस.लक्ष्मीनारायण, उनके मित्र और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेद्र मिश्र ने भी उनसे कहा कि अब चंपत राय ही इसको देखते हैं, मैं बात करूंगा लेकिन गारंटी नहीं दे सकता। एस.लक्ष्मीनारायण का कहना है कि उन्होंने करीब 50 वाट्सएप संदेश और 10-12 पत्र हाथ जोड़ते हुए बहुत विनम्रता से लिखा था कि रामचरित मानस को वहां रखवा दिए। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव से भी अनुरोध किया लेकिन उन्होंने भी कह दिया कि मैं कुछ नहीं कर सकता, जो कुछ करेंगे चंपत राय जी ही करेंगे।

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