तीन राज्यों के बीहड़ों में कैसे ख़ौफ़ बना चंबल का कुख्यात डकैत जगन गुर्जर, जिसकी अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हुई हत्या
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राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को चंबल के डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई. हत्या का आरोप उसी बैरक में बंद कैदी विष्णु जाट पर है.
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में विष्णु जाट ने हत्या करने की बात स्वीकार की है. घटना के बाद जगन के शव को ज़िला अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया, जहाँ उनके परिजनों ने दिनभर धरना दिया.

जगन गुर्जर के परिजन हत्या की सीबीआई जांच करवाने, परिवार को सुरक्षा देने, समेत अन्य मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे. मंगलवार की शाम उनकी कुछ मांगों पर पुलिस के साथ सहमति बनने के बाद वे शव ले जाने पर राज़ी हुए थे.
बुधवार को जगन गुर्जर के शव का उनके गांव में अंतिम संस्कार हुआ. इस दौरान करीब कई पुलिस थानों के पुलिसकर्मी उनके गांव में तैनात रहे.
चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जेल में हुई हत्या ने न केवल जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक बार फिर उस डकैत की कहानी को चर्चा में ला दिया है, जिसका नाम तीन राज्यों के बीहड़ों में दशकों तक भय का पर्याय रहा.
धौलपुर में भी जगन गुर्जर के परिजनों ने ज़िला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर परिवार की सुरक्षा की मांग की है.
उधर, जगन गुर्जर के परिजनों के साथ शव लेने अजमेर गए बाड़ी पुलिस थाना प्रभारी देवेंद्र शर्मा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया है कि “प्रशासन के साथ परिजनों की सहमति बन गई है.”
उन्होंने कहा है, “परिवार को सुरक्षा देने की मांग पर सहमति बनी है. जगन गुर्जर के बेटे आसाराम को सुरक्षा गार्ड दिया जाएगा और अजमेर जेल में बंद जगन के छोटे भाई को अन्य जेल में स्थानांतरित किया जाएगा. जेल अधिकारियों और जेल प्रशासन के खिलाफ जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.”
थाना प्रभारी के मुताबिक, “परिजनों की मांग पर जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार में उनके भाई पप्पू गुर्जर, धौलपुर जेल में बंद लाल सिंह और पान सिंह को शामिल होने की अनुमति मिलेगी. इसके साथ ही तत्कालीन बाड़ी एसएचओ की जांच की जाएगी.”
परिजन मंगलवार देर शाम को अपना धरना ख़त्म करके लौट गए हैं, मगर उनकी मांगों पर बनी सहमति को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं मिल सकी है.
