सालभर में 1500 फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वाला चक्रशेरू लखनऊ से गिरफ्तार, ऐसे होता था खेल
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यूपी एसटीएफ ने फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वाले गिरोह के एक और सक्रिय सदस्य चक्रशेरू उर्फ अभिषेक को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। एसटीएफ के अनुसार संगठित गिरोह अपात्र लोगों को दूसरे की फैमिली आईडी में ओटीपी बाईपास कर उसमें मेम्बर जोड़कर आईएसए (इंप्लीमेंटेशन सपोर्ट एजेंसी) तथा एसएचए (स्टेट हेल्थ एजेंसी, पीएमजेवाई) के जरिए आयुष्मान कार्ड एप्रूव कराने तथा उस कार्ड से इलाज कराकर राजस्व को भारी क्षति पहुंचा रहा था। एसटीएफ गिरोह के सक्रिय सदस्य चन्द्रभान वर्मा, राजेश मिश्रा, सुजीत कनौजिया, सौरभ मौर्या, विश्वजीत सिह, रंजीत सिह व अंकित यादव को पहले गिरफ्तार कर चुकी है।
एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह के अनुसार आरोपी चक्रशेरू ने स्वीकार किया कि उसने बीते एक वर्ष में लगभग 1500 आयुष्मान कार्ड फर्जी तरह से ऐड मेंबर व अप्रूवल के माध्यम से बनवाए हैं। जिनसे विभिन्न अस्पतालों में आसानी से फ्री में इलाज हुआ है। मेरे अतिरिक्त कुछ अन्य लोग भी इसी पोर्टल का प्रयोग कर फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाने का काम कर रहे हैं। मूलरूप से हरदोई निवासी चक्र शेरू उर्फ अभिषेक उर्फ अजय लखनऊ में तालकटोरा क्षेत्र स्थित मुनेश्वर पुरम कालोनी में रह रहा था। बीएससी पास आरोपी चक्रशेरू के कब्जे से मोबाइल फोन, लैपटाप, दो सीपीयू व एक अदद थंबस्कैनर बरामद किया गया है। लखनऊ के साइबर क्राइम थाने में दर्ज मुकदमे के तहत आरोपी की गिरफ्तारी की गई है।
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह 2023 में एसएससी की कोचिंग करने लखनऊ आया था। नवंबर 2024 में उसने 102 एंबुलेंस के आफिस में गार्ड की नौकरी शुरू की थी। मार्च 2025 में उसका परिचय अवनीश से हुआ था, जिसकी सीएससी बुद्धेश्वर चौराहे पर थी। जहां उसने अपना आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए केवाईसी करायी थी पर कार्ड पेंडिंग चला गया था। तब अवनीश ने उसे बताया कि इसको अप्रूव कराना होगा, जो उसका दोस्त चंद्रभान वर्मा 700 रुपये लेकर कर देगा। अवनीश ने उसका कार्ड एप्रूव करा दिया था। इसके बाद वह चंद्रभान व अवनीश के साथ मिलकर फर्जी कार्ड बनाने लगा। अप्रैल 2025 में चंद्रभान ने च्रकशेरू को विन्ड क्लब, न्यू हजरतगंज बुलाया था, जहां उसकी मुलाकात एक साफ्टवेयर डेवलपर से कराई गई थी, जिसने फर्जी तरीके से आयुष्मान कार्ड बनाने का पोर्टल बनाया था। उसी पोर्टल का प्रयोग कर चन्द्रभान व गिरोह के अन्य सदस्य फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने का काम कर रहे थे। साफ्टवेयर डेवलपर से उसने भी पोर्टल की आईडी पासवर्ड लिया था।
