साहित्यिक उत्सव: हरीशरण ओझा की तीन पुस्तकों का लोकार्पण
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देवरिया। साहित्यकार हरीशरण ओझा की तीन पुस्तकों देवरहा वंदन, जीवन पथ (आत्मकथा भाग-1) एवं भाव तरंग का लोकार्पण सोमवार को बाबा राघवदास भगवानदास पीजी कॉलेज बरहज के भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश शुक्ल के आवास पर हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बरहज आश्रम के पीठाधीश्वर अंजनेय दास रहे।
मुख्य अतिथि ने कहा कि किसी पुस्तक का लोकार्पण केवल कागजों का विमोचन नहीं, बल्कि लेखक के विचार, सपनों और वर्षों की साधना का सार्वजनिक उत्सव होता है। उन्होंने कहा कि लेखक ने अपनी पुस्तकों में विषयों को सरलता और गहराई से प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा कि किताब लिखना आसान हो सकता है, लेकिन उसे पूरा करना तपस्या के समान है। हरीशरण ओझा ने वर्षों की मेहनत, चिंतन और त्याग के बाद यह कृतियां समाज को समर्पित की हैं।
विशिष्ट अतिथि डॉ. ओमप्रकाश शुक्ल ने कहा कि मोबाइल और स्क्रीन के दौर में किताबें लोगों को ठहरकर सोचने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि एक अच्छी पुस्तक व्यक्ति के विचारों का दायरा बढ़ाती है और उसे स्वयं से परिचित कराती है।
डॉ. शुक्ल ने कहा कि हरीशरण ओझा की लेखनी में साधारण विषयों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता है और ये पुस्तकें उनके वर्षों के चिंतन व परिश्रम का परिणाम हैं।
कार्यक्रम के अंत में लेखक हरीशरण ओझा ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पुस्तकें जन-जन तक पहुंचें और लोग इन्हें पढ़कर साहित्यिक यात्रा को आगे बढ़ाएं।
इस अवसर पर लेखक ने अतिथियों को अपनी पुस्तकें भेंट कीं। वहीं डॉ. ओमप्रकाश शुक्ल ने अपनी पुस्तक साधना के स्वर लेखक को भेंट कर शुभकामनाएं दीं।
