स्मार्ट मीटर की परेशानियां होंगी दूर, उपभोक्ताओं को मिलेगी बड़ी राहत, नई दरों को लेकर भी अपडेट
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बीते साल के मुकाबले इस साल की बजली दरें छह महीना पहले ही जारी हो जाएंगी। नए टैरिफ आदेश के साथ ही प्रीपेड और पोस्ट पेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी तकरीबन सभी समस्याओं पर भी नियामक आयोग व्यवस्था दे देगा। कानपुर में केस्को के टैरिफ प्रस्ताव पर सोमवार को सुनवाई होगी और इसके साथ ही बिजली दरों पर जनसुनवाई की प्रक्रिया आयोग पूरी कर लेगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बिजली दरें नवंबर में जारी हुई थीं। इस साल इनके मई में ही जारी हो जाने की उम्मीद है। अब तक सभी बिजली कंपनियों के टैरिफ प्रस्ताव पर हुई सुनवाई के दौरान स्मार्ट मीटर संबंधी तमाम मसलों पर चर्चा हुई है।
मीटर खाता रीचार्ज करने के बाद भी तय समय में कनेक्शन न जुड़ना, स्मार्ट मीटर तेज चलना और जबरन स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड करने जैसे तमाम मसलों पर उपभोक्ताओं ने शिकायतें रखी हैं। टैरिफ आदेश के साथ ही इन मसलों पर भी नियामक आयोग व्यवस्था देगा। केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं हैं, यह उपभोक्ताओं का विकल्प है। केंद्र के स्पष्टीकरण के बाद आयोग स्पष्ट फैसला देगा। अभी तक स्मार्ट प्रीपेड मीटर धारकों को बिजली दरों में दो प्रतिशत की रियायत दी जाती है, जिसमें इस साल इजाफे की उम्मीद है।
उपभोक्ताओं को देना होगा कम अधिभार शुल्क
सूत्र बताते हैं कि नई बिजली दरों में औसत बिलिंग दर (एबीआर) में इजाफा होगा। अगर ऐसा होता है तो हर महीने बिल में जुड़कर आने वाले ईंधन अधिभार शुल्क में कमी हो सकती है। बीते साल टैरिफ देर से जारी होने की वजह से नवंबर तक उपभोक्ताओं को वित्तीय वर्ष 2024-25 के एबीआर से ईंधन अधिभार शुल्क पर हुई गणना की वजह से ज्यादा अधिभार शुल्क देना पड़ा था। इससे 200 करोड़ रुपये की ज्यादा वसूली हुई थी। इस रकम की वापसी का प्रस्ताव भी नियामक आयोग के पास लंबित है। सूत्र बताते हैं कि इस पर टैरिफ के पहले ही आयोग आदेश देगा।
सलाहकार समिति की बैठक के बाद जारी होगा टैरिफ
सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियामक आयोग राज्य सलाहकार समिति के साथ बैठक करेगा। इसके बाद बिजली की नई दर जारी होंगी। सूत्रों का दावा है कि नई दरें मई में ही जारी हो जाएंगी। बीते छह साल से यूपी में बिजली की दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस साल भी बिजली दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कम है। बिजली कंपनियों ने एआरआर अंतर की भरपाई के लिए दरों में 25 फीसदी इजाफे का प्रस्ताव दिया है।
