बिहार के इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक कॉलेजों में एआई की पढ़ाई मुफ्त, 52 हजार शिक्षकों की भी बहाली
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बिहार के इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की पढ़ाई नि:शुल्क होगी। इसके लिए नैसकॉम के साथ एमओयू किया गया है। इससे छात्रों को आगे प्लेसमेंट में काफी लाभ होगा। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने गुरुवार को विधानसभा में यह घोषणा की। वे शिक्षा विभाग के बजट पर सरकार का पक्ष रख रहे थे। उन्होंने इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक कॉलेजों में बेहतर सुविधा मुहैया कराने और प्लेसमेंट पर जोर देने की बात कही।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस समय स्कूलों से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या एक फीसदी से भी कम है, जबकि वर्ष 2005 से पहले यह संख्या 12 फीसदी से अधिक थी। जो बच्चे स्कूल से बाहर हैं, उन्हें भी स्कूल तक लाने की योजना पर गंभीरता से काम हो रहा है। आज सूबे में महिलाओं की साक्षरता दर 74 फीसदी हो चुकी है जबकि वर्ष 2001 में 34 फीसदी थी। मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों में सत्र सुधार के लिए प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बिहार अपने कुल बजट का 20 फीसदी शिक्षा पर करता है, यह देश में सर्वाधिक है। सरकार के उत्तर से नाराज विपक्ष ने सदन से वाकआउट किया। विपक्ष की गैर मौजूदगी में 602 अरब चार करोड़ 60 लाख 95 हजार के बजट पर मुहर लगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि 52 हजार नये शिक्षकों की नियुक्ति होगी। इनमें 45 हजार टीआरई 4 के तहत जबकि सात हजार विशेष शिक्षक बहाल होंगे। इनकी नियुक्ति दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए होगी। नियुक्ति अधियाचना बीपीएससी को भेज दी गयी है। मंत्री ने कहा कि इस साल पहली से आठवीं तक के बच्चों को 12.50 करोड़ पुस्तकों के सेट देने की योजना है।
इधर बिहार में अब स्मार्ट क्लास की पढ़ाई की निगरानी के लिए ट्रैकर तैयार होगा। इसके जरिये राज्य के मध्य और उच्च विद्यालयों में स्मार्ट क्लास पर शिक्षा विभाग नजर रखेगा। कई स्कूलों में स्मार्ट क्लास के सेटअप होने के बाद भी कई कारणों से संचालन नहीं हो रहा है।
कहीं उपकरण खराब हैं तो कहीं शिक्षकों की कमी से यह क्लास नहीं चल रहा। बच्चे पुराने ब्लैकबोर्ड पर ही पढ़ाई कर रहे हैं। हकीकत सामने आने के बाद बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपीसी) इसकी निगरानी की व्यवस्था बनाने में जुट गयी है। जल्द इसके लिए ट्रैकर तैयार होगा।
मार्च के अंत तक इसे क्रियाशील कर दिया जाएगा। ट्रैकर पर रिपोर्ट दर्ज करने का जिम्मा संबंधित स्कूल के प्राचार्य और वर्ग शिक्षक की होगी। नए सत्र से अनिवार्य रूप से स्कूलों को इसपर स्मार्ट क्लास के संचालन से संबंधित रिपोर्ट देनी होगी। वर्ग शिक्षक इसपर उपस्थिति भी दर्ज करेंगे।
