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देवरिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देवरिया द्वारा ओम मारुति सेवा समिति के सहयोग से विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया...

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देवरिया। मुख्य विकास अधिकारी राजेश सिंह की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की मासिक समीक्षा बैठक बुधवार को...

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देवरिया। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत खुरपका-मुंहपका टीकाकरण अभियान का सातवां चरण 22 जनवरी से प्रारंभ होकर 10...

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मनरेगा बचाओ साइकिल यात्रा का स्वागत देवरिया। भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा कानून को कमजोर किए जाने के विरोध में गांधीवादी...

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देवरिया। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी प्रेम नारायण सिंह ने बताया कि आयुक्त गोरखपुर को अर्हता तिथि...

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देवरिया। नितिन नवीन के भारतीय जनता पार्टी के निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह...

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देवरिया। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी प्रियंका चौधरी ने बताया कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना...

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देवरिया। दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में ऑनलाइन सत्यापन एवं अग्रसारण की अंतिम तिथि 27 जनवरी निर्धारित की गई है। मुख्य विकास...

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नोटिस को लेकर क्या कहा? इस मामले पर अपना पक्ष रखने के लिए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रेस क्रॉन्फ्रेंस बुलाई है। इसके अलावा अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है, "प्रशासन ये नहीं तय करेगा कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं है। भारत के राष्ट्रपति भी शंकराचार्य नहीं तय कर सकते, शंकराचार्य वही हैं, जिनको तीनों शंकराचार्य मानें और 2 पीठ के शंकराचार्य हमको लेकर पिछले माघ मेले में स्नान कर चुके हैं।" स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने पद की वैधता को लेकर स्पष्ट कहा कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार वही व्यक्ति शंकराचार्य होता है, जिसे अन्य पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। उन्होंने बताया कि शृंगेरी और द्वारका पीठ के शंकराचार्य उन्हें विधिवत स्वीकार करते हैं और पिछले माघ मेले में उनके साथ शाही स्नान भी कर चुके हैं, जबकि पुरी पीठ के शंकराचार्य ने भी उनके विरुद्ध कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है और सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में भी विरोध का कोई उल्लेख नहीं है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी, मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि शंकराचार्य कौन है, क्योंकि यह धर्म का आंतरिक विषय है, जिसका निर्णय केवल शंकराचार्य परंपरा के अनुसार ही हो सकता है। उन्होंने स्वयं को ज्योतिष्पीठ का निर्विवाद शंकराचार्य बताते हुए कहा कि जो लोग उनके पद पर सवाल उठा रहे हैं, वे दूषित भावना से प्रेरित हैं और यदि कोई अन्य व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य मानता है तो वह सामने आकर शास्त्रार्थ या खुली चर्चा करे। 1 min read

प्रयागराज: यूपी के प्रयागराज से बड़ी खबर है। मौनी अमावस्या पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने...

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