UP LPG Price: घरेलू सिलेंडर 60 और कमर्शियल 114 रुपये महंगा, एलपीजी 950 रुपये के पार
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UP LPG Price: ईरान-इजराइल युद्ध की वजह से खाड़ी देशों से गैस-तेल की सप्लाई पर असर दिखने लगा है। करीब 11 महीने बाद घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की रीफिलिंग 60 रुपये महंगी हो गई है। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर 114 रुपये से अधिक महंगा हो गया है। आम जनता को महंगाई से राहत मिलने के बजाय एक और बड़ा झटका लगा है।
घरेलू रसोई गैस (14.2 किग्रा) और कमर्शियल गैस (19 किग्रा) के सिलेंडरों की कीमतों में शनिवार सुबह भारी बढ़ोतरी की गई है। नई कीमतें शनिवार की सुबह छह बजे से लागू हो गई हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के रसोई बजट के साथ-साथ होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
घरेलू सिलेंडर ₹950 के पार
अब तक घरेलू रसोई गैस का 14.2 किलो वाला सिलेंडर ₹890.50 में मिल रहा था, जिसकी कीमत में ₹60 का सीधा इजाफा किया गया है। अब उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए ₹950.50 चुकाने होंगे।
कमर्शियल सिलेंडर पर ₹114.50 की मार
व्यापारिक इस्तेमाल वाले 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आया है। इसकी पुरानी कीमत ₹1891.00 थी, जिसे बढ़ाकर अब ₹2005.50 कर दिया गया है। यानी एक सिलेंडर पर ₹114.50 की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर बाहर खाना खाने और मिठाई-नाश्ते की दुकानों पर पड़ेगा, जिससे आम आदमी की थाली और महंगी होने के आसार हैं।
इससे पहले, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से नहीं बदली हैं, गैर-सब्सिडी दर 853 रुपये थी। अब हुए बदलाव से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उन व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए भी काफी वृद्धि हुई है जो दैनिक कार्यों के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। यह वृद्धि भारत की ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन उपलब्धता को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले आश्वासन दिया था कि देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को आपूर्ति में व्यवधान की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में देश के पास विविध स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति की पर्याप्त उपलब्धता है, जो खाड़ी से प्रभावित होने वाली संभावित मात्रा से कहीं अधिक है। भारत का मौजूदा कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। सूत्रों ने बताया कि सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और खाड़ी से जुड़ी संभावित आपूर्ति बाधाओं को दूर करने के लिए वैकल्पिक भौगोलिक क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ाने की योजना बना रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कच्चे तेल के आयात में काफी विविधता लाई है।
