इसराइल क्या पाकिस्तान पर तैयार नहीं है, इस्लामाबाद क्यों दे रहा है सफ़ाई?
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“अगर हमें यह कहा गया कि वहाँ जाकर लड़ना शुरू कर दें, हमास को निशस्त्र करें और उनकी सुरंगों को ख़त्म करें, तो यह हमारा काम नहीं है. यह एक मुसलमान को दूसरे से लड़ाने वाली बात होगी. हम सिर्फ़ शांति बनाए रखने और सोशल वर्क के लिए वहाँ जाने को तैयार हैं.”
यह वह स्पष्टीकरण है, जो पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने शुक्रवार को एक न्यूज़ ब्रीफ़िंग में दी.
उनसे ग़ज़ा में 3500 पाकिस्तानी सैनिक भेजने की मीडिया रिपोर्ट्स के बारे में सवाल पूछा गया था.
यह पहला मौक़ा नहीं है, जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय या ख़ुद विदेश मंत्री को ग़ज़ा में ‘इंटरनेशनल फ़ोर्स’ के लिए पाकिस्तानी सेना भेजने के मामले पर स्पष्टीकरण देना पड़ा हो.
ब्रिटेन में रहने वाली पाकिस्तान की लेखिका आयशा सिद्दीक़ा ने इसराइली अख़बार ‘हारेट्ज़’ में अपने एक लेख में दावा किया था कि राष्ट्रपति ट्रंप, फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर से ग़ज़ा में अपनी सेना भेजने के लिए कह सकते हैं और इस मामले पर फ़ैसला लेना एक बहुत बड़ा जुआ होगा.
शुक्रवार की न्यूज़ ब्रीफ़िंग में इसहाक़ डार ने कहा था कि पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य नेतृत्व के बीच इस मामले पर पूरी सहमति है कि ‘हम ग़ज़ा में बस शांति स्थापित करने के लिए जाएँगे.’
- इसहाक़ डार के मुताबिक़ शुरुआत में आठ देशों ने इंटरनेशनल स्टेबिलाइज़ेशन फ़ोर्स (आईएसएफ़) का हिस्सा बनने की रज़ामंदी दी थी और अब इन देशों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है.
