बिहार MLC चुनाव: प्रशांत किशोर ने उतारे 5 उम्मीदवार, पटना शिक्षक से दिव्या तो सारण से अफाक अहमद मैदान में
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Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर जन सुराज ने पांच प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। पार्टी ने दरभंगा शिक्षक, दरभंगा स्नातक, सारण शिक्षक, पटना शिक्षक और कोसी स्नातक सीट के लिए प्रत्याशी तय किए हैं। रविवार को प्रेस कांफ्रेंस में प्रशांत किशोर ने इसकी जानकारी दी है।
प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी से जिन्हें उम्मीदवार बनाया है, इनमें अफाक अहमद का भी नाम शामिल है। वह सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने छह साल पहले पूर्व चुनाव रणनीतिकार किशोर के समर्थन से यह सीट जीती थी। उस समय किशोर ने अपनी पार्टी का गठन नहीं किया था। पिछले हफ्ते पार्टी में शामिल हुईं वकील और शिक्षाविद दिव्या ज्योति को पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है। इस सीट पर अभी जनता दल यूनाइटेड के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार का कब्जा है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एस पी राय, दरभंगा स्नातक सीट से रवींद्र यादव और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रजनीश रंजन को भी मैदान में उतारा है।
अफाक अहमद की उम्मीदवारी को दोहरा रही पार्टी- प्रशांत किशोर
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा, “हम चंपारण से शुरुआत करेंगे, जहां हमारे पास पहले से ही एमएलसी अफाक अहमद हैं। जन सुराज पार्टी उनकी उम्मीदवारी को दोहरा रही है, इस उम्मीद और विश्वास के साथ कि शिक्षकों के प्रतिनिधि के रूप में विधानसभा में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम विधायक सारण से रिकॉर्ड संख्या में वोटों से फिर से जीतेंगे। इसी उम्मीद और विश्वास के साथ, अफक अहमद को चंपारण के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सूरज का उम्मीदवार बनाया जा रहा है।”
प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं बिहार की जनता, विशेषकर स्नातक और शिक्षक मतदाताओं से, आपके माध्यम से दो बातें साझा करना चाहता हूं। पहली बात, शिक्षकों के बारे में। बिहार में शिक्षकों का संघर्ष कई वर्षों से व्यवस्था के विरुद्ध चल रहा है। चाहे वह नियुक्त शिक्षकों का मुद्दा हो, टीआरई परीक्षा हो, वेतनमान हो, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में शामिल करना हो या उन्हें ऐसे कार्यों में शामिल करने के लिए बाध्य करना हो, या गैर-सरकारी और सरकारी संस्थानों का कुप्रबंधन हो। हमारा अब तक का रुख यह रहा है कि शिक्षक समुदाय स्वयं कई संगठनों में बंटा हुआ है।”
