दिव्या मित्तल प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए यूपी के तीन जिलों में डीएम पद पर रह चुकी हैं। देवरिया, मिर्जापुर और संतकबीरनगर में जिलाधिकारी रहने के दौरान उन्होंने कई जनहित के कार्य किए, जिसकी वजह से वे लोकप्रिय अधिकारी बनीं।
मित्तल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि मिर्जापुर के पहाड़ी गांव लहुरीडीह तक पानी पहुंचाने के कार्य को कहा जा सकता है। पानी की किल्लत झेल रहे इस गांव में दिव्या मित्तल के प्रयासों से आजादी के लगभग 76 साल बाद पहली बार नल से पानी पहुंचा। इस पर स्थानीय बुजुर्ग महिला दुईजी देवी ने भावुक होकर उन्हें आशीर्वाद दिया था।
देवरिया में तैनाती के दौरान दिव्या मित्तल ने ‘मेरा गांव, मेरा गौरव’ नाम से एक अनूठी पहल शुरू की थी। ग्रामीण समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से जिले के 800 से अधिक ग्राम प्रधानों को सीधे प्रशासनिक अधिकारियों से जोड़ा था।
सोशल मीडिया पर सरकारी कामकाज के अत्यधिक प्रचार-प्रसार के कारण विरोधियों ने उन्हें ‘रील वाली डीएम’ कहना शुरू कर दिया था, हालांकि उनके समर्थकों का मानना था कि इससे प्रशासन जनता के अधिक करीब आया।
कोरोना काल में दिव्या मित्तल संतकबीरनगर में डीएम रहीं। स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती और विकास योजनाओं को गति देने के दबाव के बीच सख्त प्रशासनिक फैसलों के साथ उनकी संवेदनशील कार्यशैली भी चर्चा में रही। उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में बनी, जो लंबी-चौड़ी बातों के बजाय सीधे मुद्दे पर आने की अपेक्षा करती थीं।
दिव्या मित्तल ने फरवरी 2019 से सितंबर 2020 तक बीडीए उपाध्यक्ष का कार्यभार संभाला। इस 19 माह के कार्यकाल में उन्होंने बीडीए पर लदे 32 करोड़ से अधिक के सरकारी ऋण को चुकाकर प्राधिकरण को डिफाल्टर होने से बचाया।
मिर्जापुर में डीएम पद पर रहने के दौरान भी दिव्या विकास को लेकर काफी सख्त थी। लोगों की मदद करने को लेकर भी वह खूब सुर्ख़ियों में रहीं। यही वजह थी कि जब उनका ट्रांसफर हुआ तो विदाई समारोह में उन्हें झूले पर बैठाकर फूलों की बारिश की गई।
दिव्या ने खाली समय में प्रतियोगियों को पढ़ाया है और दो पुस्तकें भी लिखी हैं। हाल में ही उनकी लिखी पुस्तक ‘द क्राफ्टेड जीनियस’ प्रकाशित हुई है, जिसमें उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए अपना व्यक्तिगत अनुभव व रणनीति साझा की है।
दिव्या मित्तल की धार्मिक आयोजनों में रुचि देखने को मिलती है। वे धार्मिक कार्यक्रमों में वह बढ़-चढ़कर शामिल होती रही हैं। महिलाओं व युवाओं को प्रोत्साहित करने व विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता बढ़ाने में भी उनकी भूमिका प्रमुख रही।
दिव्या मूलरूप से हरियाणा के रेवाड़ी की निवासी हैं, लेकिन उनका जन्म दिल्ली में ही हुआ। पढ़ाई भी दिल्ली में ही हुई। 10वीं और 12वीं के बाद दिल्ली में ही बीटेक किया और फिर आईआईएम बंगलुरू से एमबीए किया।
दिव्या और उनके पति गगनदीप सिंह की लंदन में बहुत अच्छे पैकेज पर नौकरी भी लग गई थी, लेकिन उनमें देश प्रेम इतना रहा कि दोनों इस्तीफा देकर लंदन से वापस लौटे और प्रशासनिक सेवा में शामिल हो गए।