भाजपा ने UP जिताने का जिम्मा इन नेता पर छोड़ा, बिहार में दिखा चुके हैं जलवा
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भाजपा ने सबसे भरोसेमंद चेहरों में शुमार विनोद तावड़े को यूपी की कमान सौंपी है। तावड़े बीते दो वर्ष से अनौपचारिक रूप से यूपी में पार्टी संगठन का प्रभार देख रहे थे। मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें विधिवत रूप से यूपी भाजपा का प्रभारी नियुक्त कर दिया। बिहार में अपना संगठन कौशल दिखा चुके विनोद तावड़े को अब नेतृत्व ने यूपी में पार्टी की हैट्रिक के लिए जमीन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। राष्ट्रीय मंत्री जगदीश ईश्वरभाई पटेल को यूपी का सह प्रभारी बनाया गया है।
पार्टी ने सोमवार को ही उन्हें दोबारा राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त किया था। इसके 24 घंटे बाद ही उन्हें यूपी का प्रभारी बना दिया है। भाजपा ने उन्हें 2022 में बिहार का प्रभारी नियुक्त किया था। तब वहां नीतीश कुमार एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री थे। तावड़े ने कहा था कि बिहार में भाजपा सरकार बनाना ही उनका लक्ष्य है। पहले 2024 के आम चुनाव में पार्टी एनडीए ने बिहार में अच्छा प्रदर्शन किया और फिर 2025 में हुए बिहार चुनाव में पहली बार वहां भाजपा की सरकार बनीं।
यूपी में निभा चुके हैं अहम भूमिका
जहां तक यूपी का सवाल है तो तावड़े की भूमिका यहां संगठन से लेकर सरकार तक में देखने को मिली है। वे यूपी भाजपा के संगठन चुनाव में केंद्रीय पर्यवेक्षक की भूमिका में थे। वहीं प्रदेश में हुए योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में भी उनकी भूमिका रही। इस दौरान वे घोषित और अघोषित रूप से कई बार यहां आए। मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के यहां गए।
पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी व महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह से अलग-अलग बातचीत कर नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपी थी। अब प्रदेश में क्षेत्रीय टीमों का गठन होना है। इसे लेकर हाल ही में उन्होंने दिल्ली में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह संग बैठक की थी।
अगड़े और पिछड़ों को साधने की कवायद
पार्टी ने प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन में ओबीसी को सर्वाधिक तरजीह दी है। वहीं विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त करने में भी सामाजिक समीकरणों का ध्यान रखा गया है। तावड़े महाराष्ट्र के मराठा क्षत्रिय बिरादरी से आते हैं, जबकि जगदीश ईश्वरभाई पटेल ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।
संसदीय बोर्ड और चुनावी समिति में बदलाव की तैयारी
विशेष संवाददाता। भाजपा के केंद्रीय पदाधिकारियों की टीम में बदलाव के बाद अब सभी की नजर केंद्रीय संसदीय बोर्ड व केंद्रीय चुनाव समिति के गठन पर टिकी है। इसके अलावा पार्टी अध्यक्ष को विभिन्न राज्यों के लिए संगठन प्रभारियों की भी नियुक्ति करनी है। इसमें यह महत्वपूर्ण होगा कि जिन नेताओं को पिछली टीम में बदलाव के तहत हटाया गया है उनको पार्टी अब क्या नई जिम्मेदारी देती है।
भाजपा की सर्वोच्च नीति निर्धारक निकाय उसका केंद्रीय संसदीय बोर्ड होता है जो सरकारों के गठन से लेकर संगठन तक के प्रमुख निर्णय लेता है। 12 सदस्यीय संसदीय बोर्ड में अभी पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, जे पी नड्डा, बी एस येदियुरप्पा, सर्वानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया व बी एल संतोष शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार इसमें छह बदलाव होने की संभावना है इनमें येद्दुरप्पा, सोनोवाल, लक्ष्मण, लालपुरा, सुधा यादव व जटिया की जगह नए नेता जगह ले सकते हैं। यानी लगभग आधा संसदीय बोर्ड बदल सकता है। इसी तरह से उम्मीदवारों को लेकर आखिरी फैसला लेने वाली केंद्रीय चुनाव समिति में भी बड़े बदलाव हो जाएंगे।
