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IAS Tukaram Mundhe: 20 साल में 25 तबादले, कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे; लोग बुलाते हैं सिंघम

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IAS Tukaram Munde FDA Success Story: जब बात ईमानदारी, कड़े फैसलों और निडर कार्यशैली की आती है, तो भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में कुछ अधिकारियों का नाम सबसे अलग चमकता है। इन्हीं में से एक हैं महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे। अपने 20 साल के सेवाकाल में लगभग 25 बार तबादले का सामना करने के बावजूद, तुकाराम मुंढे का इरादा कभी डगमगाया नहीं। जनता उन्हें प्यार और सम्मान से महाराष्ट्र का ‘सिंघम आईएएस’ कहती है।

हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के सचिव और आयुक्त के पद की जिम्मेदारी सौंपी है। पदभार संभालते ही वे एक बार फिर एक्शन मोड में आ गए हैं और पूरे राज्य में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ बड़ा अभियान चला रहे हैं। अपने कड़े एक्शन को लेकर वे सोशल मीडिया पर बहुत वायरल भी हो रहे हैं।

Meet the man on a mission – IAS officer Tukaram Mundhe | YourStory

शिक्षा और IAS बनने का सफर

3 जून, 1975 को जन्मे तुकाराम मुंढे ने 12वीं के बाद ही देश सेवा का संकल्प लिया। स्नातक (BA) के बाद उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की और UPSC की तैयारी में जुट गए। कड़ी मेहनत के बल पर साल 2005 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 20 प्राप्त की और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए।

सड़कों पर उतरे ‘सिंघम’ अफसर: मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा

महाराष्ट्र में त्योहारों और सामान्य दिनों के दौरान मिलने वाले खाने-पीने के सामान की गुणवत्ता सुधारने के लिए आईएएस तुकाराम मुंढे खुद मैदान में उतरे हैं। वे खुद बिना किसी पूर्व सूचना के दूध, पनीर, मसालों और मिठाइयों की दुकानों तथा कारखानों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। मिलावटी सामान बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

20 साल का करियर और 25 तबादले: ईमानदारी की कीमत

प्रशासनिक गलियारों में तुकाराम मुंढे अपनी सख्त छवि और नियमों का पालन कराने के लिए जाने जाते हैं। चाहे सोलापुर हो, नासिक हो, नागपुर हो या नवी मुंबई महानगरपालिका, वे जहां भी पदस्थ रहे, उन्होंने वहां भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों पर कड़ा प्रहार किया।

उनकी इसी निडरता और नेताओं के दबाव में न आने की आदत के कारण उनका बार-बार तबादला हुआ। औसतन हर 10 महीने में उनका ट्रांसफर कर दिया गया। लेकिन तबादलों से डरने के बजाय, उन्होंने इसे अपनी ईमानदारी के मेडल की तरह स्वीकार किया और जहां भी गए, वहीं जनता के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।

विद्यार्थियों और युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा

सिविल सर्विसेज (UPSC) की तैयारी कर रहे छात्रों और देश के युवाओं के लिए आईएएस तुकाराम मुंढे का जीवन एक बेहतरीन मिसाल है। वे सिखाते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी उलट क्यों न हों, अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। पद चाहे कोई भी मिले, जनता की सेवा और सुधार का जज्बा हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए।

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