Prakash veg

Latest news uttar pradesh

पेट्रोल में E20 मिलाकर भारत ने बचाए कितने करोड़ रुपये? सरकार ने जारी की रिपोर्ट

1 min read

भारत के ऊर्जा क्षेत्र और पर्यावरण सुधार की दिशा में केंद्र सरकार का ‘एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल’ कार्यक्रम एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो रहा है। रविवार को सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम ने न केवल विदेशी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम किया है, बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी ऐतिहासिक मजबूती दी है। आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान से एक तरफ जहां कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ देश के अन्नदाता यानी किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी इसने क्रांतिकारी भूमिका निभाई है।

₹1.90 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत
सरकारी रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, साल 2014-15 से लेकर मई 2026 तक, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के इस राष्ट्रीय अभियान से देश को ₹1.90 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की सीधी बचत हुई है। विदेशी मुद्रा की यह बचत भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने और अन्य विकासात्मक कार्यों में खर्च करने के काम आ रही है।

310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की जगह स्वदेशी ईंधन का इस्तेमाल
इस नीतिगत बदलाव के कारण भारत ने वैश्विक बाजार से खरीदे जाने वाले लगभग 310 लाख मीट्रिक टन विदेशी कच्चे तेल की जगह पूरी तरह से भारत में निर्मित ‘स्वदेशी एथेनॉल’ का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे, और टूटे हुए अनाजों से तैयार किया जाता है, जिसका सीधा आर्थिक लाभ देश के चीनी मिलों और किसानों को मिल रहा है।

पर्यावरण और किसानों के लिए दोहरी जीत
विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल के इस्तेमाल से वाहनों से होने वाले हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में भारी गिरावट आई है, जिससे बड़े शहरों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। इसके साथ ही, एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल की मांग बढ़ने से किसानों को उनकी फसलों का बेहतर और समय पर दाम मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग मात्रा को और अधिक बढ़ाकर भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published.

https://slotbet.online/