राम मंदिर चढ़ावा में चोरी; एसआईटी के निशाने पर चंपत राय का करीबी टिन्नू यादव, संपत्ति का ब्योरा तलब
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अयोध्या में राममंदिर के चढ़ावे में चोरी के मामले की जांच कर रही एसआईटी के निशाने पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय के करीबी आ गए हैं। एसआईटी ने एक ओर जहां विश्व हिंदू परिषद से जुड़े पदाधिकारी से पूछताछ की और उन्हें पहले से बनी प्रश्नोत्तरी थमाते हुए लिखित में जवाब मांगा है। वहीं, सबसे ज्यादा चर्चा में आए चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से लंबी पूछताछ की है। टिन्नू से उनकी संपत्ति का ब्योरा तलब किया गया है। गुरुवार को कागजात के साथ दोबारा टिन्नू को एसआईटी के सामने आना है।
एसआईटी के अफसरों ने अभिलेखों की छानबीन के दौरान खरीद-फरोख्त से जुड़े विषयों को लेकर एक प्रश्नोत्तरी तैयार की है। बताते हैं कि इसी प्रश्नोत्तरी पर विहिप के पदाधिकारी से लिखित जवाब मांगा गया है। बताया जा रहा है कि इसे लेकर पदाधिकारी ने ट्रस्ट के समक्ष नाराजगी भी व्यक्त की और कहा कि लिखित जवाब अधिवक्ता से परामर्श लेकर ही देंगे।
वहीं, रामजन्मभूमि परिसर के ग्रीन रूम में एसआईटी ने सुबह से देर रात तक टिन्नू यादव से पूछताछ की। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी ने उन पर लगाए गए आरोपों से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी ली है। जांचकर्ताओं ने टिन्नू यादव की पूर्व और वर्तमान संपत्तियों का ब्योरा मांगा। जानने का प्रयास किया कि उनके पास पहले राम मंदिर बनने से पहले कितनी संपत्ति थी और वर्तमान में कितनी है। उनके पास संपत्तियां कहां-कहां स्थित हैं और उन्हें किस प्रकार अर्जित किया गया। एसआईटी ने आयकर रिटर्न समेत कई महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारियां भी मांगी हैं। टिन्नू यादव को गुरुवार को दोबारा उपस्थित होने और संपत्तियों व अन्य वित्तीय विवरणों से संबंधित दस्तावेज साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं।
विहिप-आरएसएस पदाधिकारियों में खींचतान
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर चल रही जांच के बीच एसआईटी की गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं और आने वाले दिनों में मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की संभावना जताई जा रही है। बताया जाता है राम मंदिर की व्यवस्थाओं में लगे विहिप व संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच भी खासी खींचतान मची है। इसी खींचतान की वजह से आपसी संबंधों में माहौल भी खराब हो रहा है। इसका खामियाजा उन लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने निष्ठापूर्वक अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह किया है।
मिली जानकारी के अनुसार अभी कई बड़े पदाधिकारियों को यह आ़ंच झुलसाएगी। उसका कारण है कि एसआईटी की जांच किसी एक बिंदु तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी व्यवस्था के सम्बन्ध में है। जांच अधिकारियों को व्यवस्थाओं की पड़ताल भी करनी है और व्यवस्थागत खामियों के लिए जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी है। इसके अलावा भविष्य की सुधारात्मक कार्यवाही को लेकर आवश्यक सुझावों को भी शामिल करना है।
