Prakash veg

Latest news uttar pradesh

सम्राट ने 12 साल पहले जीता शकुनी के साथी नीतीश का भरोसा, लालू की RJD तोड़कर CM के साथ उड़े

1 min read

 बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का पहला मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी के प्रमोशन में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और पूर्व सीएम नीतीश कुमार का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण है। सम्राट के पिता शकुनी चौधरी अपने जमाने के कद्दावर नेता हैं और जब नीतीश ने समता पार्टी बनाई थी, तब वो उनके साथ ‘लव-कुश’ समीकरण के सूत्रधार थे। शकुनी नीतीश के पुराने साथी हैं। कभी नीतीश को हटाकर ही मुरेठा खोलने की बात करने वाले सम्राट पर नीतीश का भरोसा कोई 2024 में डिप्टी सीएम बनने के बाद नहीं पैदा हुआ है। सम्राट ने यह भरोसा 12 साल पहले 2014 में ही लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को तोड़कर हासिल किया था। तब नीतीश भाजपा से गठबंधन तोड़कर अकेले थे। राजद को तोड़ने के बाद सम्राट नीतीश के साथ हेलिकॉप्टर से उड़कर परबत्ता गए थे, जो उनकी विधानसभा सीट थी।

May be an image of one or more people, beard and text that says 'सम्राट चौधरी का सफरनामा 田 जन्म 16 नवंबर 1968, मुंग्ेर पिता: शाकुनि चौधरी (पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद) माता: पार्वती देवी (पूर्व विधायक) राजनीतिक सफर 1990 राजनीति में दस्तक 1999 राबड़ी सरकार में कृषि मंत्री 2000 और 2010 विधायक, परबत्ता (खगड़िया) 2014 शहरी विकास और आवास मंत्री जेडियू में शामिल uU 2018 बीजेपी में शामिल 2021 पंचायती राज मंत्री 2023 अध्यक्ष, बिहार बीजेपी 2025 विधायक, तारापुर (मुंगेर) उप-मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री 2024 उप-मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री 2026 बिहार के मुख्यमंत्री'

नीतीश ने नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ाने के विरोध में 2013 में बीजेपी से 17 साल पुराना गठबंदन तोड़ लिया था। उस समय कांग्रेस, लेफ्ट और कुछ निर्दलीय की मदद से नीतीश ने सदन में बहुमत साबित किया था, लेकिन नंबर का तनाव बना रहता था। ऐसे माहौल में लोकसभा चुनाव से पहले लालू यादव की पार्टी के विधानसभा में चीफ व्हिप सम्राट चौधरी ने राजद के 22 में से 13 विधायकों को तोड़कर सदन में अलग मान्यता मांग ली थी। बाद में 6 विधायक यह बोलकर पलट गए कि उनका दस्तखत फर्जी है या कुछ और बोलकर साइन कराया। सम्राट तब समय परबत्ता विधायक थे और सीएम के हेलिकॉप्टर में सवार होकर अपने इलाके में नीतीश को लेकर गए थे।

57 साल के सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर कई दलों से होते हुए भाजपा में पहुंचने के बाद ही परवान चढ़ा है। उनके पिता शकुनी चौधरी भी कांग्रेस से समता पार्टी होते हुए राजद, जदयू और हम में रहे। सम्राट का सफर राजद से शुरू होकर जदयू और हम से होते हुए भाजपा तक पहुंचा। राजद की राबड़ी देवी सरकार में जब वो पहली बार मंत्री बने तो भाजपा के सुशील मोदी ने उनकी उम्र पर सवाल उठाया तो राज्यपाल ने उनको हटा दिया था। बाद में वो राजद के टिकट पर परबत्ता सीट से दो बार जीते। 2014 में राजद छोड़ने के बाद सम्राट और शकुनी जदयू में शामिल हो गए।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published.

https://slotbet.online/