तेजस्वी का पार्टी में बढ़ा क़द, लालू का फ़ैसला रोहिणी और तेज प्रताप को क्यों नहीं आया रास?
1 min read
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद राजनीतिक रूप से लगभग ‘मौन साधे’ तेजस्वी यादव के लिए 25 जनवरी बड़ा महत्वपूर्ण दिन था.
तेजस्वी को राष्ट्रीय जनता दल का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया गया है. पटना में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ये प्रस्ताव पार्टी महासचिव भोला यादव ने पेश किया था जो सर्वसहमति से पारित हो गया.
दरअसल इस घोषणा के साथ तेजस्वी आधिकारिक रूप से अब पार्टी में नंबर दो पर हैं. हालांकि, लालू यादव बीमार चल रहे हैं और तेजस्वी लंबे समय से पार्टी से जुड़े सारे फैसले ले रहे हैं.
हाल ही में दिल्ली में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा कर पटना लौटे लालू यादव ने इसका प्रमाण पत्र तेजस्वी को सौंप दिया. इससे पहले 18 जनवरी 2025 को पार्टी ने तेजस्वी को लालू यादव के समान फ़ैसले लेने का अधिकार दिया था.
लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद तेजस्वी यादव के लिए इन ‘अधिकारों से लैस’ होने के बाद भी राह आसान नहीं है.
विधानसभा चुनावों में महज़ 25 सीट पर सिमट जाने वाली आरजेडी को नेतृत्व देना, पार्टी के भीतर अपनी आलोचनाओं से निपटना, परिवार के भीतर विद्रोह और बिहार में बनती नई राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी को री-इनवेंट करना तेजस्वी की चुनौतियां होंगी.
तेजस्वी से बेहतर कौन?’

पटना में रविवार को आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 25 राज्यों के प्रतिनिधि आए थे.
बैठक शुरू होने से पहले दबी जुबान में लालू यादव और तेजस्वी यादव की राजनीति करने के तौर तरीकों पर बात हो रही थी.
