पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले मतुआ समुदाय की चिंता बढ़ी
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- इल्मा हसन
- ..से,कोलकाता
पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं और मतुआ समुदाय एक बार फिर गहरे असमंजस में है.
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत वोटर लिस्ट में नामों के सत्यापन ने इस समुदाय में डर बढ़ा दिया है.
एक ओर नागरिकता के बारे में इनमें से कई लोग अनिश्चय में हैं. दूसरी ओर, यह भी डर है कि कहीं वे मतदाता बनने से भी छूट न जाएँ.
इन सबके बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मतुआ समुदाय तक पहुँच बढ़ाने और उन्हें अपने साथ बनाए रखने की कोशिशों में जुटी हुई है.
मतुआ समुदाय को बीजेपी के लिए एक अहम मतदाता आधार माना जाता है. हालाँकि अब यह चर्चा भी हो रही है कि क्या नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और अब एसआईआर की प्रक्रिया ने उनके भरोसे को डगमगाना शुरू कर दिया है?
