मोदी-जिनपिंग की मुलाकात सिर्फ भारत और ब्रिक्स के लिए ही नहीं, अमेरिका के लिए भी क्यों है अहम?
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ई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को हो रहे 18 वें ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को भारत आ रहे हैं। जिनपिंग लगभग सात साल बाद भारत आ रहे हैं। उनका यह दौरा न केवल ब्रिक्स और भारत-चीन संबंधों के लिए अहम है, बल्कि अमेरिका के लिए भी महत्वपूर्ण और संवेदनशील है।
जिनपिंग का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं । 2020 में गलवान घाटी में सीमा पर हुई झड़प के बाद से ही दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में खटास है। ऐसे में जिनपिंग के इस दौरे से दोनों देशों के बीच जम आई इस बर्फ को पिघलाने में मदद मिल सकती है।
भारत के लिए क्यों है अहम?
जून 2020 में लद्दाख में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हो गई थी, जिसके बाद से दोनों देशों ने सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी थी। इसके अलावा भारत ने टिकटॉक समेत 60 चीनी ऐप्स को प्रतिबंधित कर दिया था और चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा भी निलंबित कर दिया था। 2023 में भारत में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में भी जिनपिंग शामिल नहीं हुए थे। उनकी जगह चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग शामिल हुए थे।
हालांकि 2024 में उस समय रिश्तों में सुधार के कुछ आसार दिखे जब मोदी ने रूस में ब्रिक्स सम्मेलन से अलग शी जिनपिंग से मुलाकात की। इसके बाद पिछले साल शंघाई सहयोग संगठन (SCO)की बैठक में शामिल होने के लिए मोदी तियानजिन भी गए।
पिछले साल अक्टूबर में उस समय रिश्तों में सुधार के और संकेत मिले जब लगभग पांच साल बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान शुरू हुई। इंडिगो ने कोलकाता से ग्वांगझाउ के लिए उड़ान भरी थी। दोनों देशों के बीच फिर से सीमा विवादों को सुलझाने के लिए प्रयास शुरू हुए हैं। अगस्त में ही चीन के विदेश मंत्री वांग यी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बीच सीमा विवदों को सुलझाने के लिए बातचीत हुई। इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधि लगातार उच्च स्तर की वार्ता को जारी रखने और संवेदनशील सीमा विवादों को सुलझाने के लिए लगातार प्रयास करते रहने पर सहमत हुए थे।
दोनों देशों के बीच आर्थिक स्तर पर भी कुछ सुधार हुए हैं। भारत ने मार्च में इलेक्ट्रॉनिक, सौर उर्जा उपकरण एवं तकनीक और कुछ पूंजीगत वस्तुओं पर आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी थी।
जिनपिंग का दौरा दोनों देशों की बीच कुछ-कुछ सुधरते रिश्तों को गति दे सकती है। मोदी और जिनपिंग के बीच ब्रिक्स की बैठक से इतर बैठक हो सकती है, जिसमें न केवल सीमा विवाद को सुलझाने, बल्कि व्यापार, निवेश, सुरक्षा और एआई समेत विभिन्न तकनीकों पर बातचीत हो सकती है।
ब्रिक्स के लिए क्यों अहम है जिनपिंग का दौरा?
जिनपिंग का दौरा ब्रिक्स की साझा मुद्रा को सुलझाने के लिए अहम है, क्योंकि भारत और चीन के बीच इसे लेकर बुनियादी मतभेद है। जहाँ भारत सदस्यों देशों के बीच व्यापार को सुगम बनाना चाहता है, लेकिन किसी साझा मुद्रा के बजाय स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देना चाहता है; वहीं चीन एक साझा मुद्रा की वकालत करता है। इस विषय पर मतभेद को सुलझाना अहम है।
अमेरिका के लिए क्यों है महत्वपूर्ण
जिनपिंग के दौरे पर अमेरिका की भी नजर है। भारत-चीन के बीच बिगड़ते रिश्ते के बावजूद भी पिछले एक दशक में दोनों के बीच व्यापार लगभग दो गुना बढ़ा है। यह पिछले एक दशक में लगभग 71 अरब से बढ़कर 155 अरब डॉलर हो गया है। ट्रंप टैरिफ नितियों और अमेरिका और चीन के बीच व्यापार-युद्ध की पृष्ठभूमि में भारत-चीन के बीच बढ़ता व्यापार एक अमेरिकी विकल्प पेश करता है, जो अमेरिका के लिए चिंता का विषय है।
इसके अलावा ट्रंप हमेशा ब्रिक्स की आलोचना करते रहे हैं और इसे पश्चिम-विरोधी गुट की तरह पेश करते रहे हैं। अमेरिका इसपर इसलिए भी नजर बनाए रखता है, क्योंकि इसमें न केवल चीन शामिल है, बल्कि उसके धूर-प्रतिद्वंद्वि ईरान और रूस भी शामिल है।
अमेरिका की इसी चिंता का परिणाम है कि उसने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को बढ़ाने के लिए क्वाड को पेश किया है। क्वाड एक सुरक्षा मंच है, जिसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत भी शामिल है।
