कलावा और अंगूठी से बेटी की पहचान, फिर अंतिम संस्कार, अब जिंदा लौटी शिवानी को देख सभी हैरान
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राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र में पुलिस की जांच और शव की पहचान पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। जिस 28 वर्षीय शिवानी को मृत मानकर परिवार ने दो साल पहले भैसाकुंड में अंतिम संस्कार कर दिया था, वह 5 सितंबर को अचानक अपने घर नवीकोट नंदना पहुंच गई। जिंदा बेटी को सामने देख पूरा परिवार हैरान है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि आईआईएम रोड के पीछे नाले में मिला शव आखिर किसका था, जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
परिजनों ने बताया कि शिवानी की शादी 22 अप्रैल 2020 को बीकेटी के भुइयां देवी मंदिर में सीतापुर के सकतापुर निवासी आनंद सिंह से हुई थी। शादी के बाद ससुराल पक्ष ने बीकेटी के भीखापुर गांव में मकान बना लिया, जहां शिवानी रहने लगी। आरोप है कि कुछ समय बाद ससुराल वाले उससे प्लॉट की मांग करने लगे। मांग पूरी न होने पर विवाद बढ़ गया। दादी की मौत पर मायके आई शिवानी ने मां को पूरी बात बताई, जिसके बाद मायके वालों ने उसे ससुराल भेजने से इनकार कर दिया।
आधार लेने गई और लापता हो गई
परिजनों ने बताया कि 2 मई 2024 को सुबह 9 बजे शिवानी यह कहकर घर से निकली कि पहले भीखापुर ससुराल से आधार कार्ड लाएगी, फिर सीएचसी इंदौराबाग में पेट दर्द का इलाज कराएगी।
शाम तक न लौटने पर पिता सर्वेश सिंह उर्फ हीगू ने बेटी के ससुराल में संपर्क किया। सास शीला देवी ने बताया कि वह मड़ियांव के भारत नगर में आनंद के मामा सुशील सिंह के किराए के कमरे पर हो सकती है। वहां भी पता न चलने पर 4 मई 2024 को बीकेटी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
कलावे-अंगूठी से हुई थी शव की पहचान
शिवानी की तलाश चल ही रही थी कि 16 जुलाई 2024 को सैरपुर थाना क्षेत्र में आईआईएम रोड के पीछे नाले में एक अज्ञात महिला का शव मिला। पुलिस ने शिवानी के परिजनों को सूचना दी। परिजन मेडिकल कॉलेज पहुंचे और हाथ में बंधे कलावे और उंगली में पहनी अंगूठी के आधार पर शव की पहचान शिवानी के रूप में कर दी। परिवार ने शव को शिवानी मानकर भैसाकुंड में अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने पहचान के लिए डीएनए जांच भी कराई थी, लेकिन रिपोर्ट का इंतजार किए बिना अंतिम संस्कार हो गया।
