आजम खान को कोर्ट से मिली-जुली राहत, एक केस में बरी,तो ‘तनखईया’ बयान मामले में सजा बरकरार
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रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान के लिए शनिवार का दिन मिश्रित परिणामों वाला रहा। रामपुर सेशन कोर्ट में हुई दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई में उन्हें एक केस में बड़ी राहत मिली है, तो वहीं दूसरे मामले में उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को कोर्ट ने बरकरार रखा है।
‘तनखईया’ बयान में सजा बरकरार
पहला मामला उनके विवादास्पद ‘तनखईया’ बयान से जुड़ा था। इस मुकदमे में सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। कोर्ट ने आजम खान की अपील को खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखा है, जिससे नेताजी के लिए कानूनी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
भड़काऊ बयानबाजी में मिली राहत
दूसरी ओर, आजम खान को 2 अप्रैल 2018 को दर्ज एक पुराने मामले में बड़ी राहत मिली है। यह मामला आम आदमी पार्टी (आप) के नेता फैसल लाला द्वारा दर्ज कराया गया था।
आरोप: आजम खान पर एक वीडियो बयान के जरिए तत्कालीन डीएम और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने और भड़काऊ बयान देने का आरोप था।
निचली अदालत का फैसला: इस मामले में 18 दिसंबर 2025 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।
सेशन कोर्ट का आदेश: इस बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ वादी फैसल लाला ने सेशन कोर्ट में अपील की थी। सेशन जज डॉ. विजय कुमार की अदालत ने वादी की अपील को खारिज कर दिया और एमपी-एमएलए कोर्ट के बरी करने के फैसले को सही ठहराया।
कानूनी पेंच बरकरार
भले ही आजम खान को एक केस में राहत मिल गई हो, लेकिन ‘तनखईया’ मामले में सजा बरकरार रहने के कारण उनकी कानूनी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। रामपुर की राजनीति में सक्रिय आजम खान के लिए यह दिन अदालती कार्यवाही के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहा।
