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दिल्ली सरकार देगी हर महीने 50 हजार तक की फेलोशिप, समझिए पूरा प्लान

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क्या आप पुरानी किताबों, सदियों पुरानी इमारतों और खंडहरों में छिपी कहानियों को तलाशना पसंद करते हैं? अगर हां तो अब आपका यह शौक सिर्फ डायरी के पन्नों तक सिमट कर नहीं रहेगा, बल्कि आपकी एक बेहतरीन कमाई का जरिया भी बन सकता है। अक्सर देखा जाता है कि साइंस या इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए तो रिसर्च और फेलोशिप के कई रास्ते खुले होते हैं, लेकिन इतिहास और कला जैसे विषयों के छात्रों को रिसर्च के लिए पैसों की तंगी का सामना करना पड़ता है। इसी परेशानी को दूर करते हुए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा और बेहद शानदार कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो नई योजनाओं ‘अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप’ और ‘पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप’ को हरी झंडी दे दी गई है। इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि इसके तहत चुने गए नौजवानों को हर महीने 25 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक की मोटी रकम फेलोशिप के तौर पर दी जाएगी। यह पैसा उन युवाओं के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होगा जो अपना करियर दिल्ली की अमूल्य विरासत और इतिहास को खंगालने में बनाना चाहते हैं।

जेब में पैसा होगा तो रिसर्च भी शानदार होगी

अक्सर किसी भी बड़े शोध या रिसर्च में सबसे बड़ा रोड़ा पैसों की कमी होती है। सरकार की इस पहल से अब होनहार शोधकर्ताओं को अपने खर्चों की चिंता नहीं सताएगी। वे पूरे ध्यान और लगन के साथ अपना काम कर सकेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस योजना को मंजूरी देते हुए बिल्कुल साफ कहा कि दिल्ली सिर्फ देश की राजधानी भर नहीं है, बल्कि यह हजारों सालों की सभ्यता और संस्कृति की एक जीती-जागती मिसाल है।

इस अमूल्य धरोहर को बचाने और उसका व्यवस्थित तरीके से अध्ययन करने के लिए ही यह फंड जारी किया गया है। हर महीने 25 से 50 हजार रुपये की यह सम्मानजनक रकम युवाओं को एक संस्थागत मंच देगी। इससे न सिर्फ उनका मनोबल बढ़ेगा, बल्कि इतिहास के पन्नों में दबी वो सच्चाइयां भी बाहर आएंगी जो अब तक दुनिया की नजरों से ओझल थीं।

अभिलेखागार फेलोशिप में 15 युवाओं को मिलेगा मौका

सरकार की अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिपका मुख्य मकसद ऐतिहासिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स पर हाई लेवल की रिसर्च को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत हर साल 15 मेधावी फेलो का चुनाव किया जाएगा। इन्हें एक साल के लिए नियुक्त किया जाएगा और काम व अनुभव के आधार पर 25 हजार से 50 हजार रुपये हर महीने दिए जाएंगे। ये फेलो कोई मामूली काम नहीं करेंगे। इनके जिम्मे पुराने दस्तावेजों का डिजिटलीकरण, माइक्रो-फिल्मिंग और रिकॉर्ड मैनेजमेंट जैसे अहम काम होंगे। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस फेलोशिप में फारसी और उर्दू जैसी पुरानी भाषाओं के अभिलेखों पर खास तौर पर रिसर्च की जाएगी, ताकि दिल्ली के पुराने मिजाज और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ को सहेजा जा सके।

पुरातत्व फेलोशिप में 12 युवाओं को मिलेगी शानदार रकम

दिल्ली की सड़कों और गलियों में न जाने कितनी ऐसी इमारतें और पुरातात्विक स्थल हैं, जिनके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं। इन्हीं गुमनाम धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप शुरू की गई है। इस फेलोशिप के तहत हर साल 12 होनहार युवाओं को चुना जाएगा। इन्हें भी एक साल तक हर महीने 25 हजार से 50 हजार रुपये की शानदार रकम मिलेगी। इनका काम दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों, वास्तुकला और कम चर्चित धरोहरों का अध्ययन करना होगा। सरकार का मानना है कि इन युवाओं की रिसर्च से न सिर्फ हमारी विरासत महफूज रहेगी, बल्कि दिल्ली में सांस्कृतिक पर्यटन को भी एक नया पंख मिलेगा। जब बाहर से आने वाले पर्यटकों को नई और प्रामाणिक जानकारियां मिलेंगी, तो दिल्ली का नाम पूरी दुनिया में और भी रोशन होगा।

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