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राम मंदिर ट्रस्ट गबन, SIT रिपोर्ट में 5 बड़े खुलासे, 70 बार हुई चोरी, पर्यवेक्षण में मिली गंभीर विफलता

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Ayodhya : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए कथित चढ़ावा गबन और धांधली के मामले में SIT की 9 पेज की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। ट्रस्ट की हालिया बैठक में इस रिपोर्ट को रखा गया था, जिसके बाद यह विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक हुआ। SIT ने अपनी जांच में उन धागों को खोल दिया है जिनसे यह पूरा गबन जुड़ा था।

SIT की रिपोर्ट के 5 मुख्य बिंदु:

  1. चोरी का पक्का प्रमाण: SIT ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि गणना प्रक्रिया के दौरान भेंट की धनराशि की चोरी प्रथम दृष्टया साबित हो गई है। CCTV फुटेज में लगभग 70 बार गणना कर्मियों को नोट छिपाते या हटाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है।
  2. निरंतर चल रही प्रक्रिया: रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं थी। CCTV साक्ष्यों (27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक) के आधार पर यह स्पष्ट है कि यह चोरी बार-बार दोहराई जाने वाली एक व्यवस्थित गतिविधि थी।
  3. जानबूझकर बरती गई लापरवाही: ट्रस्ट और बैंक के बीच सुरक्षा के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और MoU मौजूद था। हालांकि, SIT ने पाया कि हंडी खोलने से लेकर बैंक में जमा करने तक के सुरक्षा नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया।
  4. 6 लोगों पर शिकंजा: जांच के दौरान अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनके खिलाफ आपराधिक दुर्विनियोग और षड्यंत्र की धाराओं में केस दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
  5. पर्यवेक्षण में विफलता: रिपोर्ट में डॉ. अनिल मिश्रा को वरिष्ठ स्तर पर पर्यवेक्षणीय विफलता के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके अलावा, सुभाग श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अनौपचारिक नियंत्रण प्रणाली को भी संदेह के दायरे में लिया गया है।

SIT ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच अभी प्रचलित है और यह एक अंतरिम रिपोर्ट है। मामले में आगे की विस्तृत जांच और अंतिम रिपोर्ट आना अभी बाकी है। इस घटना ने मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा प्रणालियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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