खामेनेई की मौत पर भारत ने जताया दुख, विदेश सचिव ने ईरानी राजदूत से की मुलाकात
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भारत सरकार ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई को गहन श्रद्धांजलि अर्पित की है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। बता दें कि 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी।
इस हमले के बाद ईरान में गहरा शोक और राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। दूसरी ओर भारत के विपक्षी दल सरकार पर कई तरह के आरोप लगा रहे हैं, साथ ही कुछ लोगों का कहना था कि भारत की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। देश के अंदर चल रही राजनीतिक बहस के बीच विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास जाकर इस दुखद घटना पर ईरान सरकार और वहां के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने शोक पुस्तिका में संदेश दर्ज किया और भारत-ईरान के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दोहराया।
ईरान में आयतुल्लाह खामेनेई के निधन के बाद 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने उनकी मौत पर श्रद्धांजलि अर्पित की है, जबकि क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। भारत ने इस संवेदनशील स्थिति में संतुलित रुख अपनाते हुए ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने का संदेश दिया है।
गौरतलब है कि गुरुवार को ही आम आदमी पार्टी ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यह देश के लिए खतरनाक संकेत है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने आज कहा कि प्रधानमंत्री की यह चुप्पी भारत के लिए खतरनाक संकेत है। अमेरिका इस युद्ध की तैयारी कई महीने से कर रहा था। उसे पता था कि युद्ध शुरू होने के बाद तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है फिर भी अमेरिका ने व्यापार समझौता के जरिए भारत को रूस से तेल नहीं लेने के लिए मना लिया। ऐसे में देशवासी जानना चाहते हैं कि क्या अमेरिका ने हमारे प्रधानमंत्री को गुमराह किया या फिर खुद प्रधानमंत्री अमेरिका को खुश रखने के लिए भारत के हितों से समझौता किया?
दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि हिंद महासागर में अमेरिकी हमले में ईरानी जहाज के डूबने की घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की चुप्पी से साफ है कि देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की घोर उपेक्षा की जा रही है।
खरगे ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान का जो जहाज टारपीडो की चपेट में आने से डूबा है यह जहाज बिना सैन्य साजो सामान के था और भारत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 से लौट रहा था। ईरानी नौसेना का जहाज ईरिस डेना भारत का आमंत्रित अतिथि था और यह विशाखापत्तनम में 15 से 26 फरवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 में शामिल हुआ था। इस आयोजन में 70 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं शामिल हुईं थीं।
