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ED vs ममता: ‘भीड़तंत्र, मूर्ख, डकैती और…’ SC में भिड़ गए तुषार मेहता-कपिल सिब्बल, जज बोले- हंगामा मत करिए

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तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि ईडी रेड में ममता बनर्जी का दखल चौंकाने वाला था. एसजी मेहता ने सवाल किया कि मुझे नहीं पता वहां छिपाने के लिए ऐसा क्या था कि मुख्यमंत्री को पूरी पुलिस फोर्स के साथ खुद घुसना पड़ा. इस पर ममता बनर्जी की ओर से पेश हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि आईपैक का दफ्तर टीएमसी दफ्तर का हिस्सा है. उन्होंने रेड की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया और कहा कि चुनाव के वक्त इसकी क्या जरूरत थी. कोर्ट रूम में ही कपिल सिब्बल और एसजी तुषार मेहता के बीच बहसबाजी को देखकर सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा और कहा कि यहां हंगामा मत कीजिए.

सुप्रीम कोर्ट में ईडी की तरफ से कोलकाता हाईकोर्ट में कल की सुनवाई और उससे जुड़े परेशानियों का का जिक्र किया गया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि कल तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने एक याचिका दाखिल की थी. उन्होंने बताया कि मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले ही मुख्य न्यायाधीश को यह आदेश पारित करना पड़ा कि केवल वही वकील अदालत में उपस्थित होंगे, जो इस मामले से सीधे जुड़े हुए हैं. कोलकाता हाईकोर्ट में हुए हंगामे का जिक्र कर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मैं वहां था. मैं आपको बताता हूं. इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि मैं भी वहां था. दोनों के बीच बहसबाजी को देखकर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि कम से कम यहां हंगामा मत कीजिए. तो चलिए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में किसने क्या दलीलें दीं.
कौन किसकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश?
  • तुषार मेहता और राजू ईडी की ओर से पेश हुए.
  • कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी टीएमसी चीफ ममता बनर्जी और डीजीपी की ओर से पेश हुए
  • अभिषेक मनु सिंघवी आईपैक की ओर से पेश हुए.
  • सुप्रीम कोर्ट में एसजी तुषार मेहता की दलीलें:
    • आई-पैक से जुड़े छापों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ ईडी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है. उन्होंने पूर्व घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पहले भी जब सीबीआई अधिकारी कार्रवाई के लिए गए थे, तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक आदेश के बावजूद उन्हें थाने ले जाया गया था.
    • SG मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने धरना दिया, जिससे किसी को भी परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया और अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन से रोका गया. उन्होंने आरोप लगाया कि एक आरोपी की जमानत याचिका के दौरान एक मौजूदा मंत्री अदालत पहुंचा और नारेबाजी की. एसजी के मुताबिक, मौजूदा मामले में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है.
    • SG मेहता ने आगे कहा कि इस मामले में ईडी को हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा. उन्होंने इसे लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र (मोबोक्रेसी) करार दिया. SG ने बताया कि हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज है कि बड़ी संख्या में वकील और अन्य लोग कोर्टरूम में घुस आए और हंगामा किया, जिसके कारण पीठ ने कहा कि माहौल सुनवाई के अनुकूल नहीं था.
    • इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने पूछा कि क्या यह घटना कल की है. SG ने स्पष्ट किया कि यह पहले की घटना है. इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने 9 तारीख का वीडियो देखा है. इस दौरान वकीलों के बीच बहस भी हुई, जिस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अदालत में हंगामा न किया जाए और कार्यवाही जारी रखी जाए.
    • SG तुषार मेहता ने दावा किया कि उन्होंने रिकॉर्ड पर व्हाट्सऐप चैट्स रखी हैं, जिनसे पता चलता है कि सत्तारूढ़ दल के कानून प्रकोष्ठ की ओर से लोगों को वहां पहुंचने के निर्देश दिए गए थे, जिसमें कहा गया था. सब लोग आओ. इस पर जस्टिस मिश्रा ने टिप्पणी की कि चाहे जानबूझकर हो या अनजाने में, हाईकोर्ट ने जो दर्ज किया है, वह महत्वपूर्ण है और ‘सब आओ’ कहना जंतर-मंतर जैसा प्रतीत होता है.
    • तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि लोगों को लाने के लिए बसें और वाहन तक लगाए गए थे. उन्होंने बताया कि कल TMC ने एक याचिका दायर की थी, जिसके बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को आदेश देना पड़ा कि केवल मामले से जुड़े वकीलों को ही अदालत में प्रवेश की अनुमति होगी. उन्होंने कहा कि यह सुनवाई लाइव टेलीकास्ट हुई, लेकिन सुनवाई संतोषजनक नहीं रही और ED को दिक्कतों का सामना करना पड़ा, यहां तक कि माइक बार-बार म्यूट किया जाता रहा.
    • इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि यह अदालत के नियंत्रण का विषय है. जवाब में एसजी तुषार मेहता ने कहा कि ED जो भी बरामद करता है, वह किसी व्यक्तिगत उद्देश्य के लिए नहीं होता. उन्होंने इसे एक असाधारण स्थिति बताया और कहा कि मुख्य न्यायाधीश भी इस बात से अवगत थे कि मामले की सुनवाई ठीक से नहीं हो पा रही है.
    • SG मेहता ने याचिका की विचारणीयता पर दलील देते हुए कहा कि PMLA की धारा 8 के तहत ED केवल सरकार का एक अंग नहीं है. उन्होंने कहा कि ED संपत्ति कुर्क करती है और अपने कब्जे में लेती है, लेकिन उसका अंतिम लाभार्थी पीड़ित होता है. विशेष अदालत पीड़ित को संपत्ति लौटाने का आदेश भी दे सकती है.
    • SG ने कहा कि वह इन पीड़ितों के हितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और ED अब तक 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूल कर चुकी है, जो अपराध के पीड़ितों को दी गई है. उन्होंने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता नंबर-2 एक व्यक्तिगत व्यक्ति है और उनके खिलाफ मुख्यमंत्री और पुलिस द्वारा तीन FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि ED ने अवैध कार्रवाई की और दबाव बनाया. SG के अनुसार, इन्हीं FIRs के आधार पर CCTV फुटेज भी हटाई गई.
    • सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने पूछा कि ED वहां किस उद्देश्य से गई थी और किस मामले की जांच चल रही थी.
      • इस पर SG मेहता ने कहा कि यह कहा जा रहा है कि ED SIR डेटा इकट्ठा करने गई थी, जबकि ऐसा कहना पूरी तरह गलत है. उन्होंने कहा कि कोई मूर्ख भी वेबसाइट पर उपलब्ध SIR डेटा लेने वहां नहीं जाएगा.
      आई-पैक छापे पर ममता बनर्जी की ओर से कपिल सिब्बल की दलीलें:
      • आई-पैक (I-PAC) पर हुई छापेमारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने विस्तृत दलीलें पेश कीं. कपिल सिब्बल ने कहा कि आई-पैक पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रबंधन का काम करता है और वर्ष 2021 में पार्टी और आई-पैक के बीच एक औपचारिक अनुबंध किया गया था. उन्होंने कहा कि यह मान लिया जाना चाहिए कि ED को इस बात की जानकारी थी. इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने सवाल किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आई-पैक कराता है या निर्वाचन आयोग.
      • इस पर कपिल सिब्बल ने जवाब दिया कि आई-पैक के पास पार्टी से जुड़ा बड़ी मात्रा में डेटा रहता है और जब ED वहां पहुंची तो उसे पता था कि पार्टी का काफी डेटा वहां मौजूद होगा. कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि चुनाव के बीच वहां जाने की क्या जरूरत थी. उन्होंने कहा कि कोयला घोटाले में आखिरी बयान 24 फरवरी 2024 को दर्ज किया गया था, उसके बाद ED क्या कर रही थी और चुनाव के बीच अचानक इतनी सक्रियता क्यों दिखाई गई. उन्होंने तर्क दिया कि यदि ED के हाथ ऐसी जानकारी लग जाती तो पार्टी चुनाव कैसे लड़ेगी. कपिल सिब्बल ने कहा कि अध्यक्ष (चेयरमैन) को वहां जाने का अधिकार था और वीडियो दिखाने पर झूठ सामने आ जाएगा.
      • कपिल सिब्बल ने कहा कि वे भी इस पूरी घटना से बेहद परेशान हैं और सवाल उठाया कि ED को पार्टी कार्यालय के उस हिस्से में क्यों जाना चाहिए था, जहां सारा चुनावी डेटा मौजूद था. इस दौरान सिब्बल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 का भी हवाला दिया. कपिल सिब्बल ने ED के इस आरोप को झूठा बताया कि मुख्यमंत्री सभी डिजिटल उपकरण अपने साथ ले गईं. उन्होंने कहा कि यह बात ED के अपने ही पंचनामा से साबित होती है और इस तरह के आरोप सिर्फ पूर्वाग्रह पैदा करने के लिए लगाए जा रहे हैं.
      • इसके बाद सिब्बल ने अदालत को पंचनामा दिखाया. उन्होंने कहा कि दोपहर 12:05 बजे तक कोई जब्ती नहीं हुई थी. उन्होंने बताया कि प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनाव से जुड़ी सारी जानकारी थी और मुख्यमंत्री ने केवल वही लैपटॉप और उनका निजी आईफोन लिया था, इसके अलावा कुछ भी नहीं लिया गया. कपिल सिब्बल ने जोर दिया कि किसी प्रकार का कोई अवरोध नहीं हुआ और इस तथ्य पर ED ने खुद हस्ताक्षर किए हैं. उन्होंने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप पंचनामा के विपरीत हैं.
      • कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि आई-पैक के पास पार्टी से जुड़ा सामग्री होने के कारण ही ED वहां गई और अधिक से अधिक जानकारी जुटाने के इरादे से यह पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की गई.
      इस पर जस्टिस मिश्रा ने टिप्पणी की कि यदि ED का इरादा जानकारी जुटाने का होता तो वे सामग्री जब्त कर लेते, जबकि ऐसा नहीं हुआ.. जवाब में कपिल सिब्बल ने कहा कि जब्ती जरूरी नहीं थी, फोटो लेकर भी जानकारी हासिल की जा सकती थी और पंचनामा से साफ है कि आई-पैक कार्यालय या प्रतीक जैन के परिसर में कुछ भी गलत नहीं हुआ.
      जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अदालत को पूरे मामले की जांच करनी होगी. इस पर सिब्बल ने आग्रह किया कि इसे प्रदर्शित कर स्पष्ट किया जा सकता है. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अदालत को नोटिस जारी करने से रोका नहीं जा सकता. जवाब में सिब्बल ने कहा कि वे सिर्फ अदालत को समझाने की कोशिश कर सकते हैं.
      कोर्टरूम में और क्या-क्या हुआ?
      • ईडी ने कहा कि इस मामले में नजीर बनना चाहिये. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा जवाब के लिए नोटिस जारी करेंगे. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष यानी ममता के लिए पेश हुए हैं. तब कोर्ट ने कहा, जो सीएम हैं, उस पर सिब्बल का जवाब था- हां.
      • कपिल सिब्बल ने कहा कि हमने कैविएट फाइल किया है, ममता का पक्ष सुना जाना चाहिये. पहले मेनटेनेबिलिटी पर बात कर लीजिए. ये लोग पहले हाई कोर्ट क्यों नहीं गए.
      • आईपैक की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोलकता हाई कोर्ट में सुनवाई जब चल रही थी उसमें जांच एजेंसी ने कहा इसकी सुनवाई को टाल दीजिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में मामला है.
      • कपिल सिब्बल ने टाइमिंग को लेकर सवाल उठाया और कहा कि चुनाव से पहले इस रेड की क्या जरूरत थी. सिब्बल ने कहा कि 2024 से मामला ईडी के पास है तो चुनाव से पहले जाने की क्या ज़रूरत थी.
      • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं. यह गंभीर मसला है हम इस मामले की सुनवाई करेंगे इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि यहां जानकारी की कलरिंग की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इससे बहुत व्यथित हैं कि हाईकोर्ट को सुनवाई नहीं करने दी गई. इस पर वरिष्ठ वकील सिब्बल ने कहा कि कल सुनवाई हुई है.
      • ईडी के वकील एस राजू ने अब इस मामले की CBI जांच की मांग की है. ईडी ने डकैती का ज़िक्र किया. सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने रॉबरी, थ्रेट, डकैती जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. और कहा कि इसलिए जांच सीबीआई करे.
      जानिए बहस की और खास बातें:
      -एएसजी राजू ने कहा कि ये मामला बेहद संगीन है. लिहाजा इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई से जांच होनी चाहिए, क्योंकि जांच के दौरान मौके पर दस्तावेजों को जबरन उठाने, धमकी देने इत्यादि से जुड़ा ये मामला है.
      -ईडी चाहता है मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सुना जाए, जबकि ममता के वकील चाहते हैं कि मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में सुना जाए.
      -कपिल सिब्बल ने कहा कि धारा 66(2) के तहत अपराध राज्य की जांच मशीनरी को रिपोर्ट किए जाने चाहिए, ईडी का पंचनामा इसके दावों के विपरीत है. इस पर जस्टिस मिश्रा ने सुनवाई के दौरान सीजेआई के तर्क समय सारणी का हवाला दिया.
      -एसजी तुषार मेहता ने कहा कि वकील मीडिया शो में मामले पर चर्चा न करें. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा-अधिकारियों को पत्रकारों को विवरण लीक न करने के लिए सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए.
    • स मिश्रा ने हल्के अंदाज में एसजी मेहता की टिप्पणी पर कहा- अगर चुनाव से पहले पैसा लॉन्ड्र किया गया तो ईडी क्या कर सकती है? इस पर एसजी मेहता ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में अभी कोई चुनाव अधिसूचित नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने समय संदर्भ पर ध्यान दिया.
      -अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोई मना नहीं कर रहा कि ममता वहां नहीं गई थी लेकिन याचिका की बातें पंचनामें से अलग हैं. मैं प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर इस याचिका की maintainability पर गंभीर सवाल उठाता हूं.
      -कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिका में क्रिमिनल ट्रेसपास की बात है लेकिन इनके पंचनामें में इसका ज़िक्र ही नहीं है. फिर इस बात पर आए मामला सीधा सुप्रीम कोर्ट क्यों आया.
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