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प्लाटिंग पर ‘सामान्य’ कनेक्शन का खेल, अमौसी जोन में लाखों का राजस्व डूबा!

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लखनऊ। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अमौसी जोन में एक बार फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जा रही है, जिस पर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं — प्लाटिंग वाली जमीन पर सामान्य श्रेणी में कनेक्शन।

दुबग्गा क्षेत्र के अमेठिया सलेमपुर इलाके में तीन कनेक्शनों को लेकर अब विभाग के गलियारों में कानाफूसी नहीं, बल्कि खुलकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जहां नियमों के मुताबिक प्लाटिंग के दायरे में आने वाले स्थलों पर 71.50 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से कनेक्शन शुल्क लिया जाना चाहिए था, वहां महज कुछ हजार रुपये में सामान्य कनेक्शन जारी कर दिए गए।

यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो विभाग को लाखों रुपये के राजस्व की चपत लगना तय माना जा रहा है। और यह चपत भी ऐसी होगी, जिसकी भरपाई अंततः जनता की जेब से ही होगी, अधिकारियों की नहीं।

तीन आवेदन, तीन कहानियां, एक सवाल 
मामले में जिन तीन आवेदनों का जिक्र सामने आया है, वे इस प्रकार हैं —

• शाहीन – आवेदन संख्या J3144357301 – जमा राशि 7155 रुपये •

मधु – आवेदन संख्या J8200072501 – जमा राशि 5755

 

रुपये • ज्ञानेंद्र – आवेदन संख्या J3375968103 – जमा राशि 5355 रुपये

अब सवाल सीधा है — क्या इन स्थलों पर कभी स्थलीय निरीक्षण हुआ भी था? क्या किसी ने मौके पर जाकर यह देखा कि यह इलाका निजी प्लाटिंग के दायरे में आता है या नहीं? अगर प्लाटिंग थी, तो सामान्य कनेक्शन किस नियम के तहत जारी कर दिया गया?

और सबसे बड़ा सवाल — संबंधित अवर अभियंता और टीजी-2 कर्मचारियों ने आखिर कैसी रिपोर्ट लगाई थी, जिस पर आंख मूंदकर कनेक्शन पास हो गए?

नियमों के जानकारों का कहना है कि प्लाटिंग क्षेत्र में कनेक्शन के लिए अलग प्रक्रिया और अलग शुल्क निर्धारित है। इसमें स्थल निरीक्षण रिपोर्ट, प्लाट का क्षेत्रफल, स्वीकृत लोड और जमा राशि का मिलान अनिवार्य है। यदि इनमें से किसी भी चरण में लापरवाही बरती गई है, तो यह सिर्फ तकनीकी चूक नहीं, बल्कि राजस्व को सीधी क्षति मानी जाएगी।

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अमौसी जोन में अधिशासी अभियंता का ज्यादातर समय वीसी और बैठकों में ही बीत रहा है। उपभोक्ताओं की समस्याएं, कनेक्शन के पेचीदा मामले — इन सबके लिए उनके पास वक्त ही नहीं है।

अधीक्षण अभियंता कमर्शियल की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। आखिर उनकी निगरानी में ऐसे कनेक्शन कैसे निकल गए? क्या फाइलें बिना देखे ही आगे बढ़ा दी गईं?

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस तरह के मामलों में फाइल नीचे से ऊपर तक कई स्तरों से होकर गुजरती है। ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि किसी भी स्तर पर गलती पकड़ में न आई हो। यही कारण है कि अब इस मामले को सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मिलीभगत की आशंका से भी देखा जा रहा है।
मामला पहुंचा मुख्य अभियंता के दरवाजे तक
अब यह मामला मुख्य अभियंता राम कुमार के दरवाजे तक पहुंच चुका है। देखना होगा कि वह इस पर निष्पक्ष समीक्षा कराते हैं या मामला भी बाकी फाइलों की तरह धूल फांकता रह जाएगा।

उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर समय रहते जांच नहीं हुई, तो ऐसे मामले आगे भी सामने आते रहेंगे और विभाग को राजस्व का नुकसान होता रहेगा।
जांच होगी या फिर ‘फाइल बंद’ का खेल?
स्थानीय लोगों और उपभोक्ताओं की मांग साफ है —

1. तीनों कनेक्शनों के आवेदन, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट, स्वीकृत लोड और जमा राशि का मिलान कराया जाए।
2. तकनीकी और वित्तीय जांच हो, ताकि यह पता चल सके कि नियमों का पालन हुआ या नहीं।
3. अगर नियमों के विपरीत कनेक्शन दिए गए हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तय हो और राजस्व की क्षति की वसूली हो।

अमौसी जोन में यह पहली बार नहीं है जब प्लाटिंग पर सामान्य कनेक्शन का मुद्दा उठा है। पहले भी इस व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हर बार जांच की बात कहकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

अब देखना यह है कि इस बार भी वही पुराना ‘हीलाहवाली’ वाला फॉर्मूला चलेगा, या फिर सच में किसी की जवाबदेही तय होगी?

क्योंकि सवाल सिर्फ तीन कनेक्शनों का नहीं है, सवाल है — विभाग का पैसा आखिर किसकी लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है?

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