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क्या यूपी चुनाव से पहले भाजपा से नाता तोड़ लेंगे संजय निषाद, आरक्षण को लेकर चेतावनी या फिर सीटों की डील?

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने बुधवार को भाजपा को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक कॉन्फ्रेंस के बहाने शक्ति प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि मछुआरा समुदाय को आरक्षण देना होगा।

संजय निषाद ने कहा, “हम अपना समर्थन तभी देंगे जब आरक्षण के लिए वादा होगा।”

निषाद ने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा की दोस्त है और नहीं चाहती कि गठबंधन को कोई नुकसान हो। भाजपा को जल्द ही कोई फैसला लेना होगा। अगर मांग पूरी नहीं हुई तो भाजपा को धोखा मिलेगा।

2027 के विधानसभा चुनावों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह चुनाव निषाद समुदाय के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा। संजय ने दावा किया कि भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ही निषाद पार्टी का सपोर्ट चाहते हैं। निषाद पार्टी के बिना सत्ता अधूरी है और सरकार को उसकी मांग पूरी करनी होगी।

संजय निषाद ने कार्यकर्ताओं से कहा कि लड़ने के लिए तैयार हो जाओ, दिल्ली दूर नहीं है। जिस दिन लोग एक्शन लेंगे, उनके पसीने छूट जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि तालकटोरा का नाम सुनते ही बड़ी पार्टियां घबरा गई हैं।

उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी के समर्थन के बिना चुनाव लड़ेंगे और समाजवादी पार्टी से ज़्यादा वोट पाकर जीतेंगे।

कन्वेंशन को संबोधित करते हुए संजय निषाद ने कहा कि निषाद समुदाय लंबे समय से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि समुदाय की आबादी लगभग 18 प्रतिशत है और उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारा हिस्सा संविधान में लिखा है। हमें क्या चाहिए? आरक्षण।” भाजपा से अपना वादा पूरा करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि निषाद समुदाय अब एकजुट हो रहा है और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है।

अपने भाषण में संजय निषाद ने निषादराज के किले और भगवान राम से जुड़े प्रसंगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि निषाद समुदाय की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करने के साथ-साथ उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ भी मिलना चाहिए।

कॉन्फ्रेंस में निषाद समुदाय ने खासतौर पर मांग की कि मझवार और तुरहा समुदायों को शेड्यूल्ड कास्ट कैटेगरी में शामिल किया जाए। संजय निषाद ने कहा कि मझवार को एक जाति के बजाय जातियों के ग्रुप के तौर पर समझने की ज़रूरत है।

दूसरे राज्यों उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दिल्ली में कुछ निषाद उपजातियों को दिए गए आरक्षण का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल किया कि यमुना पार के निषाद समुदाय को यही फ़ायदा क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि तुरहा समुदाय को भी आरक्षण का फायदा दिया जाना चाहिए।

संजय निषाद ने कहा कि निषाद समुदाय के लिए आरक्षण सुनिश्चित करना उनका मुख्य मुद्दा है और उन्होंने इसे विधानसभा और कई अन्य मंचों पर उठाया है। उन्होंने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकार इस मामले पर ठोस फैसला लें।

उन्होंने कहा कि अगर चौरी चौरा में मेरे बेटे को हराने की साजिश हुई तो भाजपा को इसका नतीजा भुगतना होगा। अपने भाषण में संजय निषाद ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले निषाद समुदाय की राजनीतिक भागीदारी और आरक्षण का मुद्दा अहम रहेगा।

उन्होंने भाजपा को चेतावनी दी कि अगर समुदाय की मांग पर कोई फैसला नहीं लिया गया, तो पार्टी को राजनीतिक नुकसान हो सकता है। खलीलाबाद लोकसभा सीट पर अपने बेटे की हार के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के सदस्यों ने उनके खिलाफ साजिश रची थी, जिसके कारण भाजपा को आस-पास की कई सीटें हारनी पड़ीं।

अब भाजपा से जुड़े कुछ लोग चौरी चौरा में भी ऐसी ही साज़िश करना चाहते हैं। अगर ऐसा हुआ तो निषाद समुदाय दूसरी सीटों पर भी बीजेपी को सबक सिखाने के लिए तैयार है। उन्होंने भाजपा से ऐसे लोगों को पार्टी से निकालने की अपील करते हुए कहा कि निषाद समुदाय उनसे निपटेगा।

संजय निषाद ने कहा कि उनके लिए उनके समुदाय का हित सबसे ऊपर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से हर गांव में संगठन को मजबूत करने और निषादराज के झंडे के जरिए समुदाय को एकजुट करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि अगर भाजपा ने आरक्षण के मुद्दे पर कोई पॉज़िटिव फ़ैसला नहीं लिया, तो पार्टी को अपनी आगे की पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी पर सोचना होगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव से भी सवाल किया और उनसे निषाद समुदाय को आरक्षण देने पर अपना स्टैंड साफ़ करने को कहा। संजय ने कहा कि अखिलेश को बताना चाहिए कि क्या वे 9 परसेंट OBC कोटे से निकालकर और उसे शेड्यूल्ड कास्ट कोटे में जोड़कर निषादों को आरक्षण देंगे।

संजय निषाद के बयान को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि प्रेशर पॉलिटिक्स के जरिए अपनी राजनीतिक सौदेबाजी को बढ़ाना छोटे दलों का पुराना आजमाया हुआ फॉर्मूला है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बीजेपी नेतृत्व इसे किसी बड़े विद्रोह या गठबंधन टूटने के संकेत के रूप में नहीं, बल्कि महज एक चुनावी पैंतरेबाजी के तौर पर देख रहा है। अतीत में भी संजय निषाद ऐन चुनावों से ठीक पहले इस तरह की बयानबाजी करते आए हैं, ताकि टेबल पर बातचीत के दौरान वे बीजेपी से अपने मनमुताबिक सीटों का कोटा हासिल कर सकें। यही वजह है कि बीजेपी उनके इन बयानों को गंभीरता से लेने के बजाय शांत रहकर वक्त बीतने का इंतजार कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों और विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, कश्यप और धीवर जैसी नदी-किनारे की उपजातियों को मिलाकर कुल आबादी लगभग 9% के आसपास मानी जाती है। अकेले मूल निषाद-केवट वर्ग की हिस्सेदारी करीब 4.5% से 5% के बीच है। बताया जाता है कि इनमें से 50 से 80 सीटें ऐसी हैं जहां निषाद मतदाता हार-जीत का रुख तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जो पूर्वांचल के गोरखपुर, गाजीपुर, बलिया, संत कबीर नगर, जौनपुर, वाराणसी, प्रयागराज और मिर्जापुर जैसे जिलों में इस समाज की पकड़ मानी जा रही। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो 2017 के विधानसभा चुनाव में इस समाज का 74% वोट एनडीए (BJP गठबंधन) को गया था, जबकि 2022 के चुनाव में यह आंकड़ा करीब 63% रहा था।समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव रामपुर की जेल में बंद आजम खान से गुरुवार को मिलने पहुंचे, इसके बाद वे उनकी पत्नी और बेटे से भी मिले। आजम खान से मिलने के बाद सपा प्रमुख ने भाजपा और चुनाव आयोग के खिलाफ निशाना साधा है। साथ ही उनके हेल्थ से जुड़े अपडेट भी दिए।

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