राम मंदिर दान चोरी: सीईओ को खुद सैलरी देगा ट्रस्ट, सरकारी दखल से दूर रखने के लिए होगा बड़ा बदलाव
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Ram Mandir Controversy: चढ़ावा चोरी जैसे जघन्य अपराध के बाद दुनिया भर में जिस तरह ट्रस्ट की फजीहत हुई है, उसे देखते हुए बड़े बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। मंदिर की प्रशासनिक सहित सभी तरह की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने और संचालन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को जवाबदेह बनाने के लिए ट्रस्ट सीईओ की नियुक्ति करने जा रहा है। एक रिटायर्ड और अच्छी छवि के सनातनी अफसर की तलाश तेज कर दी गई है। सीईओ की तनख्वाह ट्रस्ट देगा। यह माना जा रहा है कि 22 जुलाई को होने वाली बैठक में ट्रस्ट सीईओ के लिए चयनित तीन व्यक्तियों के नामों का पैनल रखेगा। इन पर चर्चा के बाद नए सीईओ के नाम का ऐलान हो सकता है। साथ ही ट्रस्ट में आमूल-चूल परिवर्तन किए जाएंगे। इसकी तैयारी भी तेज हो गई है। सीईओ को लेकर कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
चढ़ावा चोरी प्रकरण में जिस तरह एसआईटी ने कदम-कदम पर बरती गईं लापरवाहियों और गैरजिम्मेदाराना रवैये का उल्लेख रिपोर्ट में किया है, उससे ट्रस्ट के अस्तित्व पर सवालिया निशान लग गए हैं। पूरा विपक्ष एकजुट होकर ट्रस्ट को भंग करने की मांग पर अड़ा है। इस पूरे घटनाक्रम में ट्रस्ट की साख तार-तार हुई है। इसे दोबारा से प्रतिष्ठित करने के लिए ट्रस्ट में हर स्तर पर बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। सीईओ की नियुक्ति के साथ ही ट्रस्टियों का दखल भी घटाया जाएगा ताकि कोई अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न कर सके।
फूंक-फूंककर कदम रख रहा ट्रस्ट
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्टी अनिल मिश्र द्वारा अपनी शक्तियों के दुरुपयोग का खुलकर उल्लेख किया गया है। ऐसे में ट्रस्ट अब फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। ट्रस्ट एवं मंदिर प्रशासन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा। इससे जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति पूर्ण जवाबदेह होगा, ताकि दोबारा कोई घटना होती है तो जिम्मेदार के गिरेबान को पकड़ा जा सके। ट्रस्ट नहीं चाहता है कि इसमें किसी तरह का सरकारी दखल हो। गोविंददेव गिरी से हुई बातचीत का लब्बोलुआब भी यही था कि यदि प्रशासक नियुक्त होता है तो ट्रस्ट में सरकारी दखल के खतरे रहते हैं।
पूर्ण बदलाव की सहमति
सूत्रों के मुताबिक कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी, ट्रस्टी और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के पराशरण ने इस मुद्दे पर लंबी चर्चा की है। फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जब ट्रस्ट बना था, तब उसके उपनियम पराशरण ने ही तैयार किए थे। ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, सीईओ की नियुक्ति और ट्रस्ट में प्रशासनिक, वित्तीय कामकाज में बदलाव के लिए उपनियमों में संशोधन जरूरी है। माना जा रहा है कि ट्रस्ट इन प्रस्तावों को 22 जुलाई की बैठक में रखेगा। इसमें खाली पदों के लिए नए ट्रस्टियों के नाम भी प्रस्तावित होंगे। ट्रस्टी के पराशरण ने उपनियमों में बदलाव का काम शुरू कर दिया है।
तीन सदस्यीय समिति कर रही है सीईओ की तलाश
छह जुलाई की बैठक में ट्रस्ट ने सीईओ चयन के लिए तीन सदस्यों रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े की कमेटी बना दी है। यह सभी अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। कमेटी ट्रस्ट को तीन नाम सौंपेगी। अगली बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाम पर चर्चा हो सकती है। संभव है कि इसी दिन ऐलान भी हो जाए।
