अखिलेश यादव को अयोध्या से पहुंचाई जा रही थी जानकारी, पुलिस की रडार पर महंत
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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सबसे पहले उठाने वाले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को यहां की जानकारियां पहुंचाने वाले अब पुलिस और एजेंसियों की रडार पर हैं। इससे अयोध्या के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। खबर मिली है कि राम मंदिर के करीब स्थित एक मठ के महंत की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां कुछ जानकारियां जुटा रही हैं। संबंधित महंत का फोन पुलिस और जांच एजेंसियों के रडार पर है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री से संवाद की जानकारी भी पहुुंचाई
दावा किया जा रहा है कि संबंधित संत के विभिन्न लोगों से संपर्क और संवाद की पड़ताल की जा रही है। कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव तक मंदिर से जुड़े तथ्य समय-समय पर साझा करने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री की बैठकों में उनके द्वारा किए गए संवादों को विपक्ष तक पहुंचाने में उनकी भूमिका समय-समय पर उजागर हुई है। हालांकि, इन दावों की चर्चा तो खूब है लेकिन पुलिस प्रशासन से जुड़े अफसर इस पर कुछ कह नहीं रहे हैं। शासन स्तर से जुड़े इस हाई प्रोफाइल मामले में हर कोई पल्ला झाड़ रहा है।
आरएएस के पदाधिकारी पर मामले को हवा देने का आरोप
इसी बीच समूचे प्रकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक पदाधिकारी का नाम भी चर्चा में लिया जा रहा है। संबंधित व्यक्ति पर इसे हवा देने और उजागर करने का आरोप है। इसकी एक रिपोर्ट भी नागपुर तक पहुंची है। माना जा रहा है कि कुछ दिन संबंधित का दायित्व बदल जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है। इस संबंध में भी न तो संघ की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने किसी व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि की है।
अखिलेश की पोस्ट के बाद मची थी खलबली
गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर की गई पोस्ट के बाद आया था। चंपत राय ने तब अखिलेश के आरोपों को नकाराने की कोशिश भी की थी। एक वीडियो जारी किया था। तब अखिलेश यादव के पास पुख्ता जानकारी थी, इसलिए वह पीछे नहीं हटे और हमले जारी रखे। इसका नतीजा था कि मामला बढ़ता चला गया और एसआईटी का गठन करना पड़ा। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट से चोरी का खुलासा हो गया और आठ लोगों की गिरफ्तारी कर जांच तेज हो गई है।
चंपत राय ने झूठ बोला था?
एसआईटी की रिपोर्ट से साफ हो गया कि अखिलेश यादव के आरोपों से पहले ही चोरी की जानकारी चंपत राय को भी लग गई थी। अखिलेश ने सात जून को चोरी का आरोप लगाया और चंपत राय ने पांच जून को ही चोरों के यहां पुलिस को भेजकर करीब 80 लाख रुपए की बरामदगी भी करा ली थी। इसके बाद भी चंपत राय ने अखिलेश यादव को नकरारने की कोशिश की। इसी का नतीजा है कि आज विपक्ष के निशाने पर न सिर्फ चंपत राय हैं बल्कि पूरा ट्रस्ट शक के घेरे में आ गया है।
