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इंश्योरेंस कंपनी को हर्जाना भरने का आदेश, न्यायमूर्ति ने फैसला पलटा

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राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी की ओर से तकनीकी आधार पर क्लेम खारिज करने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और सुधा उपाध्याय (सदस्य) की पीठ ने भदोही के अहमद अली अंसारी की अपील स्वीकार कर लिया। साथ ही यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को वाहन की क्षतिपूर्ति मय ब्याज और हर्जाने के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है।

भदोही के आनंदडीह निवासी अहमद अली अंसारी 18 अगस्त 2015 को अपनी बोलेरो से सपरिवार हज हाउस वाराणसी जा रहे थे। बाबू सराय के पास एक अज्ञात वाहन ने उनकी बोलेरो में टक्कर मार दी, जिससे गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया था कि वाहन में क्षमता (8 व्यक्ति) से अधिक 11 लोग सवार थे, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। जिला उपभोक्ता आयोग भदोही ने भी पहले परिवादी की शिकायत निरस्त कर दी थी, जिसके खिलाफ अहमद अली ने राज्य आयोग में अपील की थी।

राज्य आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि केवल तकनीकी आधार पर या मैकेनिकल तरीके से दावों को खारिज करना पॉलिसी धारकों का बीमा उद्योग से भरोसा खत्म कर देता है। माननीय पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के ‘ओम प्रकाश बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनी को वैध आधार पर ही क्लेम रिजेक्ट करना चाहिए।

आयोग ने जिला आयोग के पुराने आदेश को अपास्त (निरस्त) करते हुए बीमा कंपनी को आदेशित किया कि, वाहन की आईडीवी वैल्यू (6,46,000 रुपये) की 75 प्रतिशत धनराशि (30,000 रुपये साल्वेज काटकर) पीड़ित को दी जाए। इस राशि पर परिवाद योजन की तिथि से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दिया जाए। मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में 5,000 रुपये और परिवाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान एक माह के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

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