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केदारनाथ से श्रीलंका तक, देश-विदेश के 62 मंदिरों की भेंट से हुआ बाबा विश्वनाथ का शृंगार

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महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर देश-विदेश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी पहुंचे। साथ ही भगवान विशेश्वर महादेव के शृंगार के लिए भी देश-विदेश के 62 मंदिरों से भेंट लाई गईं। भगवान विशेश्वर महादेव के श्रीचरणों में देश-विदेश के प्रमुख ज्योतिर्लिंग, सिद्धपीठों, शक्तिपीठों तथा प्राचीन तीर्थस्थलों से पावन प्रसाद, पूजित वस्त्र, रज, पवित्र जल और श्रद्धा उपहार अर्पित करने की परंपरा इसी वर्ष से शुरू की गई है। ये भेंट माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, उत्तराखंड के केदारनाथ, मुंबई के लाल बाग राजा और सिद्धिविनायक मंदिर, गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर, राजस्थान के नाथद्वारा मंदिर और श्रीलंका के लक्ष्मी मंदिर से आई हैं।

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विश्व भूषण मिश्रा ने रविवार को बताया कि दुनिया भर के 62 प्रमुख मंदिरों से भोग और वस्त्र प्राप्त हुए हैं। मिश्रा ने बताया कि श्रीलंका के अलावा मलेशिया से भी भेंट आई हैं। बयान में कहा गया है कि इस पहल का उद्देश्य ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को साकार करते हुए संपूर्ण सनातन समाज को एकजुट करना और वैश्विक आध्यात्मिक एकता को मजबूत करना है।

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान विशेश्वर के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का भव्य पुष्पवर्षा के साथ अभिनंदन और स्वागत किया गया। रविवार की भोर में मंगला आरती के बाद से ही विश्वनाथ धाम में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। मंदिर के बाहर सड़कों पर दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। शिवमय काशी में हर ओर ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष गूँज रहे हैं। मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि बाबा विश्वनाथ को देश-विदेश के विभिन्न मंदिरों से पावन उपहार प्राप्त हुए हैं। विशेष बात यह है कि मलेशिया और श्रीलंका के मंदिरों सहित भारत के अलग-अलग कुल 62 मंदिरों से ये उपहार अब तक पहुँच चुके हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा एक अद्वितीय और अभिनव आध्यात्मिक पहल का शुभारंभ किया गया है।

भक्तों को छह द्वारों से दर्शन कराए जा रहे हैं। मिश्र ने बताया कि भीड़ को देखते हुए भक्तों को सुगम झाँकी दर्शन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने भक्तों से अपील की है कि भीड़ के कारण खाली पेट दर्शन के लिए न आएँ। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया, महाशिवरात्रि जैसे पावन पर्व पर वाराणसी आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, व्यवस्थित एवं सकारात्मक अनुभव प्रदान करना हम सभी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनपद में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुव्यवस्थित यातायात तथा शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न संवेदनशील एवं प्रमुख स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सम्पूर्ण क्षेत्र को 4 जोन, 13 सेक्टर एवं 30 सब-सेक्टरों में विभाजित कर प्रत्येक स्तर पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। बेहतर भीड़ प्रबंधन हेतु सुदृढ़ बैरिकेडिंग एवं नियंत्रित प्रवेश/निकास व्यवस्था लागू की गई है। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी एवं कंट्रोल रूम से सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। हेल्प डेस्क एवं सूचना केंद्रों को सक्रिय रखते हुए बाहरी जनपदों एवं राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की गई है।

बाराबंकी जिले के रामनगर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ लोधेश्वर महादेवा मंदिर में भी आस्था का जनसैलाब उमड़ा। पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि रात 12 बजे से अब तक करीब ढाई लाख कांवड़िये और श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी सहित अधिकारियों ने रात में मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सुरक्षा, यातायात, पार्किंग व प्रकाश व्यवस्था के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि अभी लगभग तीन लाख और लोगों के दर्शन करने का अनुमान है और देर रात तक श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रह सकता है। वहीं मथुरा में, श्री कृष्ण जन्मस्थान की ओर से भेजे गए वस्त्र महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव को अर्पित किए जाएंगे। जन्मस्थान से शिव बारात भी निकाली जाएगी, जिसमें विभिन्न झांकियां, नृत्य दल और अखाड़े शामिल होंगे। जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि भागवत भवन स्थित केशव देवेश्वर महादेव मंदिर में शाम सात बजे से अगली सुबह तीन बजे तक महाभिषेक होगा। वहीं प्राचीन भूतेश्वर महादेव सहित अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।

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