वायु प्रदूषण पर प्रति सेकंड 3.39 लाख खर्च करता है भारत, GDP को 5.4% का नुकसान: रिपोर्ट

भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद यानि जीडीपी का 5.4% वायु प्रदूषण में खर्च करता है जबकि देश सेहत पर सकल घरेलू उत्पाद का करीब 1.28% खर्च करता है। CREA और Green Peace South Asia की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण से विश्व को होने वाली सालाना क्षति 2.9 ट्रिलियन डॉलर के करीब आंकी गई है, जो विश्व की कुल जीडीपी का 3.3 फीसदी है वहीं देश में प्रति वर्ष 10.7 लाख करोड़ (150 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की क्षति होती है, जो देश की जीडीपी का 5.4 फीसदी के करीब है। यानि भारत हर सेकंड 3.39 लाख रुपये वायु प्रदूषण पर खर्च करता है।

बता दें कि इससे चीन को 900 बिलियन यूएस डॉलर और अमेरिका को 600 बिलियन अमेरिकी डॉलर की क्षति पहुंच रही है। जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत होती है और भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है।  रिपोर्ट के अनुसार, इसके चलते भारत में प्रतिवर्ष करीब दस लाख मौतें होती हैं और 10.7 लाख करोड़ की क्षति होती है। मामले में भारत, चीन और अमेरिका के बाद तीसरे नंबर पर है।

एक पूर्व अध्ययन ने 2017 में गणना की थी कि भारत में प्रति मिनट 4 लोग – या वर्ष में 2.3 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई, जो दुनिया में सबसे अधिक थी। CREA-Green Peace की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों की कुल संख्या 4.5 मिलियन है। जिसका अर्थ है कि वायु प्रदूषण के कारण हर दो मिनट में 17 लोगों की मौत हुई। प्रत्येक मौत के कारण औसतन 19 साल की उम्र का नुकसान हुआ, यानि दुनिया ने सामूहिक रूप से 85.5 मिलियन साल खो दिए। वैश्विक रूप से, जीवाश्म ईंधन के जलने से होने वाले वायु प्रदूषण के कारण 2018 में आर्थिक नुकसान 2.86 ट्रिलियन डॉलर के करीब था – जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार से थोड़ा अधिक है, जो कि 2018-19 में 2.8 ट्रिलियन डॉलर थी।

आर्थिक लागत का एक अन्य स्रोत यह है कि हर साल बच्चे के अस्थमा के लगभग 350,000 नए मामले जीवाश्म ईंधन से जुड़े हैं। भारत में लगभग 1,285,000 बच्चे जीवाश्म ईंधन से होने वाले प्रदूषण की वजह से अस्थमा के शिकार हैं। रिपोर्ट के अनुसार जीवाश्म ईंधन से प्रदूषण के संपर्क में आने से होने वाली बीमारी के कारण लगभग 49 करोड़ दिन लोगों ने काम से छूट्टी ली है।

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