FATF की बैठक से ठीक पहले हाफिज सईद की सजा पाक की चाल? भारत ने फैसले के असर पर उठाए सवाल

हाल की मीडिया रिपोर्टों में देखा गया कि पाकिस्तान की एक अदालत ने आतंकी फंडिंग मामले में संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियुक्त आतंकवादी हाफिज सईद को सजा सुनाई है। यह पाकिस्तान के लंबे समय से लंबित अंतरराष्ट्रीय दायित्व का हिस्सा है ताकि आतंकवाद के समर्थन को रोका जा सके। ध्यान दिया जाए कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक की पूर्व संध्या पर ये फैसला लिया गया है। इसलिए, इस निर्णय का प्रभाव भी देखा जा सकता है।

यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या पाकिस्तान अपने नियंत्रण में आने वाले सभी आतंकवादी संगठनों और क्षेत्रों से काम करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा और मुंबई और पठानकोट सहित सीमा पार आतंकवादी हमलों के अपराधियों को त्वरित न्याय दिलाएगा। बता दें कि पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधक अदालत ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद को बुधवार को आतंकवाद को वित्त पोषण के दो मामलों में 11 साल के कैद की सजा सुनायी है। अदालत के एक अधिकारी ने पीटीआई को इसकी पुष्टि की है कि पंजाब प्रांत में आतंकवाद को वित्त पोषण करने के दो मामलों में सईद को सजा दी गई है।फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) की कार्रवाई से बचने के लिए पाकिस्तान में एक बार फिर हाफिज सईद के खिलाफ दिखावटी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान एफएटीएफ की काली सूची में पड़ने से बचने के लिए पहले भी इस तरह की अदालती कार्रवाई को उदाहरण के तौर पर पेश करने का प्रयास करता रहा है। उसे बार-बार मोहलत मिलती रही है, पर पाक ने आतंक के स्रोतों पर निर्णायक कार्रवाई नहीं की।

सूत्रों के मुताबिक भारत पाकिस्तान की दिखावटी कार्रवाई को बहुत तवज्जो नहीं देता। सच यही है कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का रवैया बहुत ही लचर रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को उसने पूरा नहीं किया। एफएटीएफ की आंख में भी धूल झोंककर बचने का प्रयास करता रहा है। सूत्रों ने कहा कि भारत पाकिस्तान की दिखावटी कार्रवाई पर नजर रखते हुए उसे बेनकाब करने का सिलसिला जारी रखेगा। भारत ने पहले भी अंतरराष्ट्रीय समूह को बताया है कि पाकिस्तान अपने यहां आतंकी अड्डों को पाल-पोस रहा है।

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