कर्नाटक: CAA पर बच्चों के नाटक और राष्ट्रद्रोह की पूरी कहानी – ग्राउंड रिपोर्ट

26 साल की नज़्बुन्निसा कहती हैं, “मुझे नहीं पता कि मैं यहाँ कैसे पहुंच गई.”

नज़्बुन्निसा सिंगल मदर हैं जो दूसरों के घरों पर काम कर गुज़ारा करती हैं. उन्होंने हमें अपना पूरा नाम नहीं बताया.

उन्हें और फ़रीदा बेगम को 30 जनवरी को गिरफ़्तार किया गया था. फ़रीदा उस स्कूल में टीचर हैं जहां उनकी बेटी पढ़ाई करती है. दोनों महिलाओं पर राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाया गया है जिससे दोनों इनकार करती रही हैं.

कर्नाटक के दक्षिण में बसे बीदर ज़िले की जेल में मेरी उनसे मुलाक़ात हुई. जेल अधिकारी के कमरे में मेरी इन दोनों मुसलमान महिलाओं से मुलाक़ात हुई. उन्होंने कहा कि वो मज़बूत बने रहने की बहुत कोशिश कर रही हैं लेकिन अचानक से उनकी ज़िंदगी में उथल-पुथल आ गई है.

स्कूल में खेले गए एक नाटक के बाद इन दोनों महिलाओं की गिरफ़्तारी हुई. दोनों पर राष्ट्रद्रोह के आरोप लगाए गए हैं.बीदर के शाहीन स्कूल में एक कार्यक्रम में का आयोजन हुआ था जिसमें बच्चों ने नागरिकता संशोधन क़ानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विषय पर नाटक पेश किया. इस कार्यक्रम में 9 से 12 साल की उम्र के बच्चे शामिल थे.

एक बच्चे के अभिभावक ने इस नाटक को सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीम किया.

नाटक में एक बूढ़ी महिला कहती है कि वो अपनी नागरिकता साबित करने के लिए अपने दस्तावेज़ नहीं दिखाएंगी और चप्पलों से ‘मोदी’ को मारेंगी.

इस नाटक के बारे में नीलेश रक्षाल नाम के एक व्यक्ति ने शिकायत की जो ख़ुद को सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं. उनका कहना है कि उन्होंने ‘प्रधानमंत्री के साथ दुर्व्यवहार करने और स्कूल में नफ़रत फैलाने के लिए स्कूली बच्चों का इस्तेमाल के लिए स्कूल के ख़िलाफ’ शिकायत दर्ज कराई है.

इस मामले में स्कूल मैनेजमेंट और नाटक का लाइव स्ट्रीम करने वाले अभिभावक के ख़िलाफ़ भी शिकायत दर्ज की गई है.

पुलिस के पास जो एफ़आईआर दर्ज है उसमें नज़्बुन्निसा और फ़रीदा बेगम का ज़िक्र नहीं है लेकिन पुलिस की रिमान्ड रिपोर्ट में इन पर ‘मुसलमान समुदाय में नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ ग़लत जानकरी फैलाने और अपने नाबालिग़ बच्चों को प्रधानमंत्री को चप्पल से मारने की बात सिखाने का आरोप लगाया गया है.’

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21 जनवरी को शाहीन स्कूल का वार्षिकोत्सव था. स्कूल के ऑडिटोरियम में दिनभर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए.

शाहीन एजुकेशन फ़ाउंडेशन के सीईओ तौसीफ़ मेडीकेरी के अनुसार शाहीन स्कूल एक अल्पसंख्यक स्कूल है जिसकी 9 राज्यों में 43 शाखाएं हैं. उनका कहना है कि बीदर स्कूल में क़रीब 50 फ़ीसदी ग़ैर-मुसलमान छात्र पढ़ते हैं.

वो बताते हैं कि अब तक पांच बार बच्चों से पूछताछ की गई है. इस घटना का सबूत तीन मिनट की एक वीडियो क्लिप है जिसे लाइव स्ट्रीम किया गया था. ये वीडियो क्लिप फ़िलहाल हटा दिया गया है.

यह वीडियो क्लिप मोहम्मद यूसुफ़ रहीम के सोशल मीडिया अकाउंट से लाइव स्ट्रीम किया गया था. यूसुफ़ इस मामले में तीसरे आरोपी हैं. हमने उनसे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई.

25 जनवरी को नीलेश रक्षाल ने सोशल मीडिया में इस नाटक का वीडियो देखा.

वो कहते हैं कि वो इसी दिन देर शाम अपने दो दोस्तों और एक वकील के साथ स्कूल के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करने के लिए पुलिस स्टेशन गए. अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि शाहीन स्कूल प्रबंधन ने एक नाटक में प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है और समुदायों के बीच घृणा फैलाई है. शिकायत में यह भी कहा गया कि राष्ट्रद्रोही गतिविधियां हो रही हैं जिस पर पुलिस को क़दम उठाना चाहिए.

26 जनवरी को इस मामले में स्कूल के प्रेसिडेंट, स्कूल प्रबंधन और मोहम्मद यूसुफ रहीम के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई. भारतीय दंड संहिता के तहत धर्म के आधार पर नफ़रत फैलाने के लिए जानबूझ कर अपमानजनक शब्दों के प्रयोग, ग़लत प्रचार और देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया.

27 जनवरी को पुलिस ने स्कूल परिसर का दौरा किया और सीसीटीवी फ़ुटेज लिया.

28 जनवरी को पुलिस एक बार फिर स्कूल पहुंची और उन बच्चों से पूछताछ की जो नाटक में शामिल थे. हालांकि स्कूल के सीओओ तौसीफ़ मेडीकेरी का आरोप है कि पुलिस ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया. उनका कहना है कि बच्चों से पूछताछ करते वक़्त एक पुलिस अधिकारी वर्दी में अपने हथियार के साथ थे. पुलिस अधीक्षक नागेश डी एल ने उनके आरोपों से इनकार किया है.

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नीलेश रक्षाल
मेडीकेरी बताते हैं कि पूछताछ के दौरान 12 साल की एक बच्ची (जिसने नाटक में बूढ़ी महिला का किरदार निभाया था) ने पुलिस को बताया कि उसकी मां ने संवाद लिखने और सीखने में मदद की थी. इसके बाद ही से बच्ची की मां पर सवाल उठने शुरू हुए.

30 जनवरी को पुलिस ने बच्ची की 26 साल की मां और 52 साल की स्कूल टीचर को हिरासत में लिया. उन्हें कस्टडी में लेकर ज़िला अदालत में पेश किया गया और दोनों महिलाएं अब बीदर ज़िला जेल में हैं.

31 जनवरी को पुलिस बच्चों से पूछताछ करने के लिए फिर एक बार स्कूल पहुंची. इस बार वो बाल कल्याण विभाग के सदस्यों के साथ थे. स्कूल के अधिकारी बताते हैं कि बच्चों से 3 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई.

1 फ़रवरी और 4 फ़रवरी को पुलिस फिर स्कूल गई और बच्चों से पूछताछ की. स्कूल अधिकारियों का कहना है कि हर बार लगभग 3 घंटे तक पूछताछ चली. 9 से 12 साल की उम्र के क़रीब 70 बच्चों का कहना है कि लगभग 8 बच्चों से कई बार पूछताछ की गई थी.

हालांकि एसपी नागेश डी एल का कहना है कि यह जांच का हिस्सा था. उन्होंने कहा, “जांच अधिकारी को कई बार स्कूल का दौरा करना पड़ा क्योंकि सभी बच्चे एक बार में स्कूल में नहीं मिले. स्कूल से सीसीटीवी फ़ुटेज हमने बरामद किया, लेकिन हमें पता चला कि घटना के दिन का फ़ुटेज मिटा दिया गया है. इसे अब फॉरेंसिक के लिए भेजा गया है. इस मामले पर हमने क़ानूनी राय मांगी है और जल्द ही एक रिपोर्ट दायर करेंगे.”

घटना के बाद से स्कूल प्रबंधन के कुछ सदस्य और स्कूल के प्रेसिडेंट फ़रार हैं. कितने लोग फ़रार हैं इसकी सही-सही जानकारी नहीं मिल पाई है.

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